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This Article is From Dec 18, 2011

कांग्रेस ने मुस्लिम वोट का गलत इस्तेमाल किया : मायावती

बहुजन समाज पार्टी ने ब्राह्मण रैली, दलित और पिछड़ों रैली के बाद आज मुस्लिम, वैश्य और क्षत्रिय सम्मेलन का आयोजन किया।
Lucknow: उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मुस्लिम आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा है कि पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए उनकी आबादी के अनुपात में अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित 27 प्रतिशत कोटे को बढ़ाये जाने और इसके लिए संविधान में संशोधन किए जाने की जरूरत है। मायावती ने पार्टी की मुस्लिम, क्षत्रिय एवं वैश्य रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बसपा मुसलमानों को आरक्षण देने का समर्थन करती है। पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए आवश्यक है कि उनकी आबादी के अनुपात में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे को बढ़ाया जाय और इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाए। यह कहते हुए कि वर्ष 1995 में पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने पर भी उन्होंने पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को आरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया था, बसपा मुखिया ने मांग की है कि मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए, जिससे देश के सभी राज्यों में उनके लिए आरक्षण की समान व्यवस्था लागू की जा सके। मायावती ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इसने 40 वर्षों तक मुसलमानों के वोट पर राज किया, मगर उनके हितों के साथ धोखा किया, जिसके कारण मुस्लिम समाज की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति खराब होती गई, जो सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में सबके सामने आ गई है। कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में मेरठ, मुरादाबाद से लेकर बिहार के भागलपुर दंगों का उल्लेख करते हुए मायावती ने आरोप लगाया, कांग्रेस के शासनकाल में देश में सबसे ज्यादा दंगे हुए और उन 40 वर्षों में मुसलमानों को सहम कर रहना पड़ा। कांग्रेस पर भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों के प्रति नरमी का रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए बसपा मुखिया ने कहा कि भाजपा के प्रति कांग्रेस के नरम रुख के कारण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठन मजबूत होते गए और उसके परिणामस्वरप अयोध्या में 6 दिसम्बर को (विवादित ढांचे का ध्वंस) दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई, जिसके बाद पूरे देश में दंगे हुए और मुसलमानों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई। यह आरोप लगाते हुए कि उससे पहले 1990 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के भड़काऊ भाषणों के कारण प्रदेश में तनाव बढ़ा और दंगे हुए, जबकि पिछले वर्ष 30 सितम्बर को जब विवादित स्थल के मालिकाना हक के मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अपना निर्णय सुनाया, तो बसपा सरकार की सूझ-बूझ  के कारण कहीं भी कानून एवं व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं होने पाई। बसपा मुखिया ने कांग्रेस सहित सभी दलों पर मुस्लिम हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा, बसपा ने मुसलमानों को विधानसभा और लोकसभा में सबसे ज्यादा टिकट दिए और उनमें आत्म-विश्वास पैदा करने के लिए उन्हें सरकार तथा मंत्रिपरिषद में हमेशा महत्वपूर्ण पदों पर रखा गया। मुसलमानों के नाम को आतंकवाद से जोड़े जाने की आलोचना करते हुए मायावती ने कहा कि दो-चार लोगों की गलती से पूरे समुदाय को जोड़ा जाना गलत है और आतंकवादियों की न तो कोई जाति है और न कोई मजहब। मायावती ने कहा कि आतंकवाद बढ़ने के कारण को समझना होगा और इस पर काबू पाने के लिए अभिसूचना तंत्र को मजबूत करते हुए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा।
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