
सुबह-सुबह जंतर मंतर पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था। मध्य प्रदेश के कुछ किसान ट्रेन से सुबह 4 बजे स्टेशन से सीधे जंतर-मंतर ही पहुंचे लेकिन 9 बजते-बजते ख़बर आई कि जंतर मंतर से क़रीब 600 मीटर की दूरी पर संसद मार्ग पर भी कुछ किसान बैठे हैं और वहां भी मंच बन रहा है।
जब वहां पहुंचे तो वहां का नज़ारा बिल्कुल अलग था। बड़ी तादाद में किसान वहां बैठे हुए थे, महिलाएं अलग और पुरुष अलग और बेहद शांतिपूर्ण ढंग से। जंतर मंतर पर देशभक्ति के गीत बज रहे थे लेकिन संसद मार्ग पर सन्नाटा पसरा था। अभी कोई बड़ा नेता मंच पर नहीं था सब व्यवस्था में लगे थे। धीरे-धीरे संसद मार्ग पर भीड़ बढ़ने लगी।
12 बजते-बजते अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव अतुल अनजान बड़े काफ़िले के साथ पहुंचे। फिर जंतर मंतर छोड़कर अण्णा सीधे संसद मार्ग पहुंचे उन्हें देखकर वहां बैठे लोगों का जोश बढ़ गया। संसद मार्ग में अण्णा के मंच से मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये कानून बन गया तो सरकार प्रॉपर्टी डीलर की तरह हो जाएगी।
राजनीतिक पार्टी बनाने के बाद ये पहला ऐसा मौका था जब केजरीवाल अण्णा के साथ आए। हालांकि अतुल अंजान और हनानमुल्लाह केजरीवाल के मंच पर आने के विरोध में उठकर चले भी गए। इससे पहले अण्णा हजारे भी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और किसानों के हक को लेकर मोदी सरकार को लगातार निशाने पर लेते रहे। उन्होंने कहा, जेल भरेंगे तब जाकर मोदी सरकार का दिमाग सही होगा।
संसद मार्ग पर अण्णा का साथ देने कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और कार्यकर्ता पहुंचे। साथ ही बड़ी संख्या में किसान भी यहां आए, अपनी परेशानियों और उम्मीदों के साथ। हालांकि शुरुआत में लोगों के बीच अण्णा के मंच को लेकर गफलत बनी रही, क्योंकि सोमवार को अण्णा जंतर-मंतर पर थे और मंगलवार को संसद मार्ग पर।
सरकार पर दबाव बनाने को लेकर बेशक अण्णा का दो दिनों का ये आंदोलन अब पूरा हो गया हो, लेकिन अण्णा और उनके समर्थकों का जोश देखकर तो यही कहा जा सकता है कि पिक्चर अभी बाकी है।
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