"राजनीतिक नहीं थी" पवार की मेजबानी में विपक्ष के नेताओं की बैठक पर NCP का बयान

शरद पवार के घर मंगलवार को राजनीतिक दलों की बैठक ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले तीसरे मार्चे की तैयारी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है.

शरद पवार के घर जुटे थे तमाम राजनीतिक दलों के नेता

नई दिल्ली:

शरद पवार के घर मंगलवार को राजनीतिक दलों की बैठक ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले तीसरे मार्चे की तैयारी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है. इस बैठक में कांग्रेस नदारद थी जबकि तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल और वाम दलों समेत आठ विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि उन्होंने शरद पवार से अपने संगठन राष्ट्र मंच के लिए सभा की मेजबानी करने के लिए कहा था. बताते चलें कि सिन्हा ने साल 2018 में ‘राष्ट्र मंच' का गठन किया था. 

राष्ट्र मंच के संस्थापकों में शामिल और NCP नेता माजिद मेनन ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह बैठक किसी भाजपा विरोधी मोर्चे या गैर-कांग्रेसी मोर्चे के गठन के लिए नहीं थी. उन्होंने कहा, ‘‘यह किसी गैर-भाजपाई राजनीतिक मोर्चे की बैठक नहीं थी जिसे शरद पवार ने बुलाया हो. यह उनके आवास पर हुई राष्ट्र मंच की बैठक थी. समान विचार वाले लोगों ने बैठक में भाग लिया और बैठक में अनेक अराजनीतिक लोग उपस्थित थे.'' मेनन ने इन अटकलों को खारिज किया कि गैर-कांग्रेसी मोर्चा बनाने की कवायद चल रही है. उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई कोशिश नहीं है. उन्होंने कहा कि विवेक तन्खा, मनीष तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी और शत्रुघ्न सिन्हा को बैठक के लिए बुलाया गया था लेकिन वह नहीं आ सके. 

बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली जिसमें सिन्हा के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी (सपा) के घनश्याम तिवारी, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी, आम आदमी पार्टी (आप) के सुशील गुप्ता, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के बिनय विस्वाम तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता नीलोत्पल बसु शामिल हुए. बसु ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि यह राजनैतिक मीटिंग नहीं थी बल्कि समान विचार वाले लोगों के बीच चर्चा थी, जहां कोविड मैनेजमेंट, संस्थाओं पर हमला और बेरोजगारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई. 


बैठक में कांग्रेस नेता भले ही नदारद रहे हो लेकिन मीटिंग के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शरद पवार से अलग से मुलाकात की. जब राहुल गांधी से तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद जुड़े सवाल पूछा गए तो उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति पर चर्चा के लिए नहीं है. देश के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल पवार के हर राजनीतिक दल में नेताओं से अच्छे संबंध हैं, उनके ही प्रयासों से महाराष्ट्र में विपरीत विचारधारा वाली शिवसेना और कांग्रेस ने राकांपा के साथ हाथ मिलाकर सरकार बनाई.

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इससे पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोमवार को पवार से उनके आवास पर मुलाकात की थी लेकिन मंगलवार को हुई बैठक से उन्होंने खुद को अलग कर लिया. NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा कि "मुझे नहीं लगता कि तीसरा या चौथा मोर्चा मौजूदा सरकार के लिए एक सफलतापूर्वक चुनौती के रूप में उभर सकता है," उन्होंने कहा कि पिछली बार तीसरे मोर्चे के मॉडल को आजमाय़ा जा चुका है और यह मॉडल मौजूदा राजनीतिक गतिशीलता के अनुकूल नहीं है.