कोराना की दूसरी लहर धीमी पड़ने के बाद इंडस्‍ट्री सेक्‍टर में हालात सुधरे लेकिन अभी भी कई चुनौतियां..

हालात कोरोना से  पहले जैसे होने में अभी काफी वक्त लगेगा. बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्‍टरियों  में दूसरी कोरोना की लहर के बाद काम बढ़ा जरूर है लेकिन कई मोर्चों पर चुनौतियां अभी बनी हुई है .

ग़ाज़ियाबाद के बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित तोशी ऑटोमेटिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्रोडक्शन दूसरी कोरोना लहर के दौरान धीमा पड़ गया था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में हाइटेक ऑटोमेटिक सिस्टम और प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ने से यहां काम भी बढ़ा है. वर्करों की संख्या भी जून के मुकाबले करीब 50% ज्‍यादा है. मार्केट सेंटीमेंट में सुधार हुआ है और नए ऑर्डर आए हैं लेकिन स्टील, आयरन और एल्यूमीनियम जैसे कमोडिटीज की कीमतें बढ़ने की वजह से कंपनी का इनपुट कॉस्ट बढ़ गया है. चुनौतियां कई मोर्चों पर बनी हुई हैं.

तोशी ऑटोमेटिक सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, संजीव सचदेव ने NDTV से कहा, "प्रोडक्शन तेजी से नहीं बढ़ा पा रहे हैं क्योंकि स्टील, केमिकल, आयरन, एल्‍युमीनियम की कीमत 30 से 40% तक बढ़ चुकी है. बैंक भी इंश्योरेंस कंपनी की तरह काम कर रहे हैं, जितना ज्यादा रिस्क उतना ज्यादा प्रीमियम. क्रेडिट जितना चाहिए बैंकों से नहीं मिल पा रहा है." संजीव कहते हैं , " कोविड से पहले और कोविड के बाद  माहौल और कारोबार में सब कुछ बदल गया है. पहले credit पर माल मिलता था. अब महंगाई की वजह से Vendor पहले कैश  मांगते हैं. कमोडिटीज के दाम  डॉलर और यूरो की तरह बदल जाते हैं". उन्होंने कहा, "पिछली दिवाली में लगता था कि अगली दिवाली पता नहीं देख पाएंगे या नहीं. अब कम से कम ऐसा लगता है कि अगली दिवाली देख पाएंगे. मार्केट सेंटीमेंट में सुधार जरूर हुआ है लेकिन स्टील, एल्‍युमीनियम  और दूसरी कमोडिटीज के महंगा होने से इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ गया है और बिजनेस प्रभावित हो रहा है". .

बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले मजदूर कहते हैं कि पिछले कुछ महीनों में काम के मौके  बढ़े जरूर हैं लेकिन रोजगार में तो  कोरोना से पहले के मुकाबले  सिर्फ 50 फ़ीसदी तक ही सुधार हो पाया है.मजदूरी भी घट गई है. वर्कर गफूर अहमद ने NDTV से बातचीत में कहा, " अभी भी कोरोना महामारी के असर की वजह से फैक्टरियों में कोरोना से  पहले जैसे हालात नहीं हो पाए हैं". उनके सहयोगी वर्कर मोहसिन सैफी कहते हैं, "कोरोना से पहले हमें काम के हजार रुपए तक मिल जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है कमाई 50 फ़ीसदी तक अभी कम है. हालात कोरोनावायरस जैसे नहीं हैं." एक लोकल फैक्ट्री में काम करने वाले बिजेंदर कहते हैं, बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया जो मजदूर कोरोना काल के दौरान इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़ कर गए थे, उसमें से 50 फीसदीअब भी वापस नहीं आए हैं.

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जाहिर है, हालात कोरोना से  पहले जैसे होने में अभी काफी वक्त लगेगा. बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्‍टरियों  में दूसरी कोरोना की लहर के बाद काम बढ़ा जरूर है लेकिन कई मोर्चों पर चुनौतियां अभी बनी हुई है . छोटी  और लघु इकाइयां चाहती हैं कि सरकार बाजार में कमोडिटी प्राइसेज की कीमतों को स्थिर करे और बैंक उन्हें ज्यादा 'क्रेडिट' मुहैया कराएं.