
वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय भाषाओं के पक्ष में वकालत की और कहा कि यह काफी अपमानजनक होता है, जब विदेशी दौरों पर विभिन्न देशों के लोग अपनी भाषाओं में बात करते हैं और भारतीय अंग्रेजी भाषाओं में संवाद करते हैं।
कुसुमांजलि साहित्य सम्मान 2014 के दौरान आडवाणी ने कहा, मेरा जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। विदेशी दौरों पर यह काफी अपमानजनक होता है कि विभिन्न देशों के लोग अपनी भाषाओं में बात करते हैं, लेकिन भारत से जाने वाले अधिकतर लोग, यहां तक की आपस में भी अंग्रेजी में बात करते हैं। जब वे अंग्रेजी में बात करते हैं, वे अच्छे नहीं लगते हैं।
आडवाणी ने कहा कि कुछ चीजें हैं, जो काफी दुखद है। उनमें से एक है अपनी भाषाओं में नहीं बोलना तथा दूसरी भाषाओं में बात करना। इस कार्यक्रम में आडवाणी को सम्मानित किया गया।
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