बीजेपी अगर हम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही तो वह किसानों के समर्थन में उतरे : संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों की नहीं सुन रहे, हम किसान महापंचायतें करते रहेंगे

बीजेपी अगर हम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही तो वह किसानों के समर्थन में उतरे : संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह (फाइल फोटो).

मेरठ:

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने आज मेरठ में कहा कि प्रधानमंत्री किसानों (Farmers) की नहीं सुन रहे हैं. हम उनको सुनाने आए हैं. हम लगातार किसानों के मुद्दे उठा रहे हैं. अगर बीजेपी (BJP) को किसानों की पड़ी होती तो यहां 100 दिन से किसान धरने पर नहीं बैठते. बीजेपी अगर हम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है तो उसे किसानों के समर्थन में उतर आना चाहिए. वह भी तो राजनीति ही कर रही है. हम आगे भी किसान महापंचायतें करते रहेंगे. 

संजय सिंह से प्रश्न करने पर कि क्या आप लोगों ने यहां मेरठ से यूपी चुनाव का बिगुल फूंक दिया है? क्या अरविंद केजरीवाल गन्ना किसानों के भुगतान और बिजली बिल के भुगतान को लेकर चुनावी वादा कर गए हैं? उन्होंने जवाब दिया हमने जो दिल्ली में किया है वही बता रहे हैं. और गन्ना किसानों का भुगतान तो होना ही चाहिए. तो ये वादे कर गए हैं तो क्या गलत है. अरविंद केजरीवाल ने जो वादे दिल्ली में किए वो निभाए और यहां भी निभाएंगे. 


कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन (Farmers Protest) करीब तीन महीने से चल रहा है. किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसान महापंचायत में हिस्सा लिया. इस मौके पर सांसद संजय सिंह भी मौजूद थे.  

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किसानों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मेरे देश का किसान बहुत दुखी है. 95 दिनों से हमारे किसान भाई अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ धरने पर हैं. 250 से ज़्यादा किसान भाइयों की शहादत हुई है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. पिछले 70 साल में किसानों को सिर्फ़ धोखा मिला है. उन्होंने कहा कि किसानों को सभी पार्टियों ने धोखा दिया है. किसान अपनी फ़सल का सही दाम ही मांग रहा है. हर पार्टी का घोषणा पत्र चुनाव से पहले कहता है कि हम फ़सलों का सही दाम देंगे, सभी पार्टियां कहती हैं आपका लोन माफ़ कर देंगे. पिछले 25 साल में 3.5 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं. किसी पार्टी को इनकी परवाह नहीं है.