
अमरनाथ में इस वर्ष निर्मित हुआ हिम शिवलिंग।
नई दिल्ली:
कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में हो रहे इजाफे के बीच गृह मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम इस समय श्रीनगर में है। आतंकवादी घटनाओं में हो रही वृद्धि के कारणों का पड़ताल के अलावा टीम ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। पहलगाम और बालटाल की सुरक्षा व्यवस्था के आकलन में लिए एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस दौरान अमरनाथ यात्रा करने वालों तीन स्तर पर सुरक्षा देने का फैसला किया है।
अमरनाथ यात्रा के अंतर्गत उन सभी यात्रियों को पंपोर से गुज़रना पड़ेगा, जो पहलगाम से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। चूंकि यात्रा का पारंपरिक रूट यही है इसलिए ज़्यादातर श्रद्धालु यहीं से अपनी यात्रा शुरू करते हैं। एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर में हुई इस बैठक में रोड ओपनिंग पार्टी, कैंप और गुफ़ा की सुरक्षा का भी आकलन किया गया। सीमा पार से बढ़ रही घुसपैठ पर भी विचार हुआ।
गौरतलब है कि कश्मीर में अभी अर्ध सैनिक बलों की 125 कंपनियां है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की 80 कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ सेना को भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी के. राजेंद्रा ने बताया कि ख़ास जगहों पर QRT तैनात की गई है और हम यात्रा में कोई ख़लल नहीं होने देंगे।'
कश्मीर घाटी में हाल के समय में बड़ी हिंसा के लेकर नेशनल कॉन्फ्रेस नेता और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उमर ने कहा, 'हालत ख़राब होते जा रहे है। सुरक्षा कर्मियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। घुसपैठ की घटनाएं भी बढ़ी हैं। साफ़ है कि राज्य सरकार इन सभी मसलों को लेकर संजीदा नहीं है। दूसरी ओरजम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश आंकड़ों में बताया गया है कि लोकल रिक्रूटमेंट कम हुआ है और वर्ष 2016 में अभी तक सिर्फ़ 23 लड़के जिहाद के नाम पर आतंकवाद से जुड़े हैं। राज्य में इस वर्ष अब तक हिंसा की 79 घटनाएं सामने आई हैं जबकि वर्ष 2015 में यह संख्या 53 थी।
आंकड़ों के जरिये राज्य सरकार ने बताया है कि 2016 में पहले छह माह में ही 46 आतंकवादी गिरफ़्तार हुए हैं जबकि 2015 में 31 गिरफ़्तार किये गए थे। सरकार ने बताया कि आतंकी घटनाओं में इस वर्ष केवल 7 नागरिक मारे गए हैं जबकि पिछले साल यह संख्या 13 थी। चिंताजनक बात यह है कि ऐसी घटनाओं में अब तक 29 जवान शहीद हो चुके हैं जबकि 2015 में यह संख्या 19 थी।
अमरनाथ यात्रा के अंतर्गत उन सभी यात्रियों को पंपोर से गुज़रना पड़ेगा, जो पहलगाम से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। चूंकि यात्रा का पारंपरिक रूट यही है इसलिए ज़्यादातर श्रद्धालु यहीं से अपनी यात्रा शुरू करते हैं। एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर में हुई इस बैठक में रोड ओपनिंग पार्टी, कैंप और गुफ़ा की सुरक्षा का भी आकलन किया गया। सीमा पार से बढ़ रही घुसपैठ पर भी विचार हुआ।
गौरतलब है कि कश्मीर में अभी अर्ध सैनिक बलों की 125 कंपनियां है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की 80 कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ सेना को भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी के. राजेंद्रा ने बताया कि ख़ास जगहों पर QRT तैनात की गई है और हम यात्रा में कोई ख़लल नहीं होने देंगे।'
कश्मीर घाटी में हाल के समय में बड़ी हिंसा के लेकर नेशनल कॉन्फ्रेस नेता और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उमर ने कहा, 'हालत ख़राब होते जा रहे है। सुरक्षा कर्मियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। घुसपैठ की घटनाएं भी बढ़ी हैं। साफ़ है कि राज्य सरकार इन सभी मसलों को लेकर संजीदा नहीं है। दूसरी ओरजम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश आंकड़ों में बताया गया है कि लोकल रिक्रूटमेंट कम हुआ है और वर्ष 2016 में अभी तक सिर्फ़ 23 लड़के जिहाद के नाम पर आतंकवाद से जुड़े हैं। राज्य में इस वर्ष अब तक हिंसा की 79 घटनाएं सामने आई हैं जबकि वर्ष 2015 में यह संख्या 53 थी।
आंकड़ों के जरिये राज्य सरकार ने बताया है कि 2016 में पहले छह माह में ही 46 आतंकवादी गिरफ़्तार हुए हैं जबकि 2015 में 31 गिरफ़्तार किये गए थे। सरकार ने बताया कि आतंकी घटनाओं में इस वर्ष केवल 7 नागरिक मारे गए हैं जबकि पिछले साल यह संख्या 13 थी। चिंताजनक बात यह है कि ऐसी घटनाओं में अब तक 29 जवान शहीद हो चुके हैं जबकि 2015 में यह संख्या 19 थी।
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