
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
देश में 10 मजदूर संगठनों की दिन भर चली हड़ताल को केंद्र सरकार ने बेअसर करार दिया। केंद्र सरकार के सूत्र बता रहे हैं कि संगठनों की 12 मांगों में 9 पर सरकार राज़ी है। तीन मुद्दों - विदेशी निवेश, विनिवेश और ठेके की मज़दूरी पर वो बात करने को तैयार है। ठेके के मजदूरों का पैसा बढ़ाया जा सकता है और सरकार उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने को तैयार है, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने दावा किया, 'देश में कामकाज स्वभाविक है, नियंत्रित है।' प्रधान ने इशारा किया कि इस हड़ताल के पीछे कुछ मज़दूर संगठनों की मंशा राजनीतिक भी है। उन्होंने कहा, 'हमने ट्रेड यूनियन्स को समझाने की कोशिश की। कुछ समझे, कुछ नहीं समझे...उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरी होगी वो ही करेंगे।'
उधर विपक्ष ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों की वजह से ही मज़दूरों ने हड़ताल की। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'सरकार की नीतियां ज़िम्मेदार हैं हड़ताल के लिए...ये सूट-बूट की सरकार है।'
हड़ताल का असर कई औद्योगिक क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखा। उद्योग जगत ने दावा किया है बुधवार की हड़ताल से क़रीब 25 हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ है।
इंडस्ट्री एसोसिएशन एसोचैम के मुताबिक मज़दूर संगठनों की हड़ताल की वजह से बैंकिंग जैसी सर्विसेस सेक्टर के साथ-साथ पॉवर, तेल और गैस के साथ-साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ा और इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डी.एस. रावत ने एनडीटीवी से कहा, 'हमने कई संगठनों से मिले इनपुट के आधार पर आंकलन किया है कि इस हड़ताल की वजह से अर्थव्यवस्था को 25000 करोड़ का नुकसान हुआ।'
उद्योग जगत की चेतावनी है कि ऐसी हड़ताल से बाज़ार के माहौल पर असर पड़ेगा। विकास दर अभी ही नीचे आ रही है। अगर ये टकराव नहीं टला तो संकट बड़ा हो सकता है।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने दावा किया, 'देश में कामकाज स्वभाविक है, नियंत्रित है।' प्रधान ने इशारा किया कि इस हड़ताल के पीछे कुछ मज़दूर संगठनों की मंशा राजनीतिक भी है। उन्होंने कहा, 'हमने ट्रेड यूनियन्स को समझाने की कोशिश की। कुछ समझे, कुछ नहीं समझे...उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरी होगी वो ही करेंगे।'
उधर विपक्ष ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों की वजह से ही मज़दूरों ने हड़ताल की। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'सरकार की नीतियां ज़िम्मेदार हैं हड़ताल के लिए...ये सूट-बूट की सरकार है।'
हड़ताल का असर कई औद्योगिक क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखा। उद्योग जगत ने दावा किया है बुधवार की हड़ताल से क़रीब 25 हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ है।
इंडस्ट्री एसोसिएशन एसोचैम के मुताबिक मज़दूर संगठनों की हड़ताल की वजह से बैंकिंग जैसी सर्विसेस सेक्टर के साथ-साथ पॉवर, तेल और गैस के साथ-साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ा और इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डी.एस. रावत ने एनडीटीवी से कहा, 'हमने कई संगठनों से मिले इनपुट के आधार पर आंकलन किया है कि इस हड़ताल की वजह से अर्थव्यवस्था को 25000 करोड़ का नुकसान हुआ।'
उद्योग जगत की चेतावनी है कि ऐसी हड़ताल से बाज़ार के माहौल पर असर पड़ेगा। विकास दर अभी ही नीचे आ रही है। अगर ये टकराव नहीं टला तो संकट बड़ा हो सकता है।
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