सरकार को करना है पंडितों की कश्मीर वापसी के समय का फैसला : सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, कश्मीर के हालात काफी सुधरे,अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई

सरकार को करना है पंडितों की कश्मीर वापसी के समय का फैसला : सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह

सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल कुलदीप सिंह.

नई दिल्ली:

कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की वापसी कब तक हो पाएगी इसका अंतिम फैसला सरकार को करना है लेकिन वहां के हालात को बेहतर बनाने में सीआरपीएफ समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियां जुटी हैं. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के डीजी कुलदीप सिंह ने आज यह बात कही. उन्होंने कहा कि कश्मीर के अब हालात काफी सुधर रहे हैं. खासकर अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है.  

कुलदीप सिंह ने कहा कि पिछले एक साल में जम्मू कश्मीर में 91 इनकांउटरों में 175 आतंकी मारे गए हैं. 183 आतंकी पकड़े भी गए हैं. दो आतंकियों ने सरेंडर किया है. डीजी ने यह भी कहा कि सीआरपीएफ के कुछ कैंप उन पंडितों के घर पर जरूर हैं जो 90 के दशक में घाटी छोड़कर चले गए थे. अगर वे कहेंगे तो सीआरपीएफ उनके घर खाली कर देगा. 

इस बार सीआरपीएफ का 83 वां स्थापना दिवस 19 मार्च को पहली बार जम्मू में मनाया जाएगा. इसमें मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह होंगे. 

फिल्म 'कश्मीर फाइल्स' सीआरपीएफ के जवानों को दिखाने के विषय पर कुलदीप सिंह ने कहा कि अभी तक इसको लेकर कोई अंतिम फैसला नही लिया गया है, पर इतना जरूर है कि अगर कोई फिल्म अच्छी प्रेरणा देती है तो उसकी स्क्रीनिंग की जा सकती है.

डीजी कुलदीप सिंह ने कहा कि 25 फरवरी को बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के हमले में सहायक कमांडेट विभोर कुमार सिंह को समय पर हेलीकॉप्टर की मदद न मिलने के लिए अगर कोई जिम्मेदार है वह मैं स्वयं हूं क्योंकि मेरे आदेश पर ही ऑपरेशन होते हैं. 

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विभोर की पत्नी ने आरोप लगाया है कि अगर समय पर उनके पति को हेलीकॉप्टर से लाया जाता तो उनके पैर नहीं काटने पड़ते. इस पर डीजी सिंह ने कहा कि ऐसी जगहों पर हेलीकॉप्टर तो उपलब्ध  होता है लेकिन खराब मौसम और रात में उड़ाने का फैसला तो पायलट का ही होता है दो नब्बे फीसदी से ज्यादा मौके पर सही साबित होते हैं. इसमें तकनीकी मुद्दे होते हैं जिसको समझना पड़ेगा. इसको लेकर सीआरपीएफ ने वायुसेना, बीएसएफ और प्राइवेट हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों से कई बार बात की है. ज्यादातर मौकों पर यही पाया गया कि वह भी जिम्मेदार आदमी है और अनुकूल हालात होने पर हेलीकॉप्टर जरूर उड़ाते हैं. हलांकि कई बार हमें लगता है कि वह अगर समय पर उड़ा लेते तो घायल जवान की जान बच जाती, पर जब तक सब कुछ ओके नहीं होगा तब तक वे फ्लाई नहीं करेंगे.