New Delhi:
केंद्र में कम्पनी मामलों के मंत्री मुरली देवड़ा ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि इसकी वजह उन्होंने व्यक्तिगत बताई है और कहा कि वह अपना समय कांग्रेस को देना चाहते हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। उनके इस्तीफे की पेशकश मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल से ठीक पहले आई है। कहा जा रहा है कि वह अपने बेटे मिलिंद देवड़ा को मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं और इसलिए मंत्रिमंडल में एक स्थान रिक्त कर रहे हैं। मिलिंद दक्षिण मुम्बई से दूसरी बार सांसद बने हैं। वहीं, एक समाचार चैनल से बातचीत में मुरली देवड़ा ने कहा, "व्यक्तिगत कारणों से मैंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटने की पेशकश है। मैं कांग्रेस पार्टी की सेवा करना चाहता हूं, जहां से मेरा राजनीतिक कॅरियर शुरू हुआ। मैं कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री को उनके लगातार सहयोग तथा दिशा-निर्देश के लिए धन्यवाद देता हूं। मुझे पार्टी की सेवा कर खुशी होगी। मैं पार्टी के निर्णय का स्वागत करूंगा।" कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, मुरली देवड़ा ने अपना इस्तीफा पिछले सप्ताह ही पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया था। वह मंत्रिमंडल में अपने बेटे के लिए जगह चाहते हैं। राजनीतिक हलकों में मुरली देवड़ा के 'इस्तीफे की पेशकश' को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मसौदा रिपोर्ट से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिसमें 2006 से 2008 के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ठेका देने में नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है। उस वक्त मुरली देवड़ा पेट्रोलियम मंत्री थे। लेकिन उन्होंने इससे इंकार किया और कहा कि सीएजी रिपोर्ट की शुरुआत उन्होंने ही की थी। उनके इस्तीफे की पेशकश को इस संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि फेरबदल में कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। वह 2006 से जनवरी 2011 तक केंद्र में पेट्रोलियम मंत्री थे। जनवरी में मंत्रिमडल में फेरबदल के बाद उन्हें कम्पनी मामलों का मंत्रालय सौंपा गया था।