
भोपाल:
बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन स्वास्थ्य कारणों के चलते भोपाल में आयोजित 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में नहीं आ पाए। लेकिन उन्होंने अपने एक संदेश में महात्मा गांधी और संत कबीरदास के उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भाषा तभी समृद्ध होती है जब वह अन्य से उनके प्रभावकारी शब्दों को ग्रहण करती है।
उन्होंने कहा, 'फिल्में प्राय: सामान्य जन के लिए होती है, इसलिए इनमें सामान्य बोलचाल के शब्दों का प्रयोग हुआ। देश-काल के अनुसार कथानक बनता है तथा परिवेश के अनुसार संवाद गढ़े जाते हैं। वहां हिन्दी का एक रूप नहीं है कई तरह की हिन्दी हैं। परिवेश के अनुसार फिल्मों में उर्दू मिश्रित हिन्दी यानी हिन्दुस्तानी में संवाद लिखे जाते हैं। शोले में सूरमा भोपाली की हिन्दी मालवी मिश्रित है, जबकि पीके भोजपुरी हिन्दी बोलता है।'
शुक्रवार शाम तक अमिताभ के इस सम्मेलन में आने की बात थी लेकिन देर रात बताया गया कि दांत की सर्जरी के कारण वह नहीं आ सकेंगे। उनके नहीं आने की खबर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हिन्दी सम्मेलन के आयोजक राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे ने शुक्रवार को उन्हें फोन किए, लेकिन अमिताभ ने फोन नहीं उठाया।
दवे ने हालांकि बताया कि अमिताभ ने शनिवार को भेजे अपने संदेश में सफाई दी है कि अचानक दांतों की सर्जरी के कारण वह शिवराज और उनका फोन नहीं उठा सके। इसके लिए वह क्षमा चाहते हैं। अमिताभ का शहर में काफी इंतजार था और उनके नहीं आने से 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन की चमक कुछ फीकी भी पड़ी।
बहरहाल अमिताभ ने अपने संदेश में कहा, 'फिल्म जगत में हिन्दी शब्दकोश से शब्द नहीं लिए, कठिन साहित्यिक हिन्दी से भी नहीं बल्कि जीवन से लिए हैं।' उन्होंने कहा, 'गांधी जी ने सही कहा था कि वे रहेंगे तो अपने घर में, लेकिन सभी दरवाजों और खिड़कियों को खोलकर ताकि धूप और हवा का प्रवेश उसमें होता रहे। इसमें निहित अर्थों को हम समझें तो हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, तमिल, तेलगु, हिन्दुस्तानी, बांग्ला, आदि भाषाओं से जुड़े तमाम मुद्दों का व्यावहारिक समाधान हम खोजने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।'
अमिताभ ने कहा कि कबीरदास ने भी मिलीजुली भाषाओं का प्रयोग किया जो पचमेल कहलाई, लेकिन ऐसा करके उन्होंने सरलता से अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाई।
उन्होंने कहा, 'फिल्में प्राय: सामान्य जन के लिए होती है, इसलिए इनमें सामान्य बोलचाल के शब्दों का प्रयोग हुआ। देश-काल के अनुसार कथानक बनता है तथा परिवेश के अनुसार संवाद गढ़े जाते हैं। वहां हिन्दी का एक रूप नहीं है कई तरह की हिन्दी हैं। परिवेश के अनुसार फिल्मों में उर्दू मिश्रित हिन्दी यानी हिन्दुस्तानी में संवाद लिखे जाते हैं। शोले में सूरमा भोपाली की हिन्दी मालवी मिश्रित है, जबकि पीके भोजपुरी हिन्दी बोलता है।'
शुक्रवार शाम तक अमिताभ के इस सम्मेलन में आने की बात थी लेकिन देर रात बताया गया कि दांत की सर्जरी के कारण वह नहीं आ सकेंगे। उनके नहीं आने की खबर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हिन्दी सम्मेलन के आयोजक राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे ने शुक्रवार को उन्हें फोन किए, लेकिन अमिताभ ने फोन नहीं उठाया।
दवे ने हालांकि बताया कि अमिताभ ने शनिवार को भेजे अपने संदेश में सफाई दी है कि अचानक दांतों की सर्जरी के कारण वह शिवराज और उनका फोन नहीं उठा सके। इसके लिए वह क्षमा चाहते हैं। अमिताभ का शहर में काफी इंतजार था और उनके नहीं आने से 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन की चमक कुछ फीकी भी पड़ी।
बहरहाल अमिताभ ने अपने संदेश में कहा, 'फिल्म जगत में हिन्दी शब्दकोश से शब्द नहीं लिए, कठिन साहित्यिक हिन्दी से भी नहीं बल्कि जीवन से लिए हैं।' उन्होंने कहा, 'गांधी जी ने सही कहा था कि वे रहेंगे तो अपने घर में, लेकिन सभी दरवाजों और खिड़कियों को खोलकर ताकि धूप और हवा का प्रवेश उसमें होता रहे। इसमें निहित अर्थों को हम समझें तो हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, तमिल, तेलगु, हिन्दुस्तानी, बांग्ला, आदि भाषाओं से जुड़े तमाम मुद्दों का व्यावहारिक समाधान हम खोजने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।'
अमिताभ ने कहा कि कबीरदास ने भी मिलीजुली भाषाओं का प्रयोग किया जो पचमेल कहलाई, लेकिन ऐसा करके उन्होंने सरलता से अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाई।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
बॉलीवुड, अमिताभ बच्चन, भोपाल, भोपाल में विश्व हिन्दी सम्मेलन, महात्मा गांधी, संत कबीरदास, Dental, Amitabh Bachchan, Big-B, World Hindi Summit, Bollywood