
Hey ladies, you're not safe at ALL in a metro or metro stations. I'll tell you how.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
A man followed me in the metro today. Mind you, 20 mins back. That is 8 pm. On a Sunday. Pretty normal right?
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"वह आदमी मेरे पास खड़ा था, यह काफी नॉर्मल बात है, अमूमन कई सारे लोग एक ही रास्ते पर सफर करते हैं. ये सही नहीं होता कि एकदम से किसी पर शक किया जाए."Stood near me in the metro on my route. Seemed pretty normal. A LOT of people take the same route. It's not fair to pin point anyone.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
Got off at the Golt Course metro station. Stood nearby, while pretending to talk on the phone with somebody. I was waiting for parents.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"मैं गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन पर उतर गई. वह आदमी मेरे पास ही खड़ा था. किसी से बात करने का नाटक कर रहा था. मैं अपने पैरेंट्स का इंतजार कर रही थी."Tried to listen to my conversations with father to know where I was going. I sensed something was fishy and immidiately put on earphones
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"इसके बाद वह आदमी मेरी बात सुनने की कोशिश करने लगा कि मैं अपने पापा से क्या बात कर रही हूं, कहां जा रही हूं. जब मुझे इस बात का अहसास हुआ तो मैंने ईयरफोन लगा लिए. "
And started talking silently in the mic. He starts circling me. I see my father arrive and I start walking down. Mind you, no security.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"मैं धीरे-धीरे बात करने लगी. वह मेरे चारों तरफ घूमने लगा. इसके बाद मैंने अपने पापा को देखा और चलने लगी. उस समय वहां पर कोई सुरक्षा नहीं थी."I still don't try to be unfair and test waters by stopping regularly at steps. He stops with me. I rush to the car and he tries to push me.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"मैं उस पर यूं ही आरोप नहीं लगा सकती थी इसलिए मैंने रुक-रुक कर चलकर देखा. जहां मैं रुक रही थी, वह भी वहीं रुक रहा था. उसके बाद मैं पापा की कार की तरफ दौड़ी. उस आदमी ने मुझे धक्का देने का प्रयास किया."Into a shady corner at the end of the staircase. I push him away, slap him.And make a LOT of noise. I ask him to stop and so I can catch him
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"सीढ़ियां खत्म हो चुकी थीं. मैंने उसे धकेल दिया और थप्पड़ मारा. मैंने हल्ला मचाया और उसे रुकने के लिए कहा ताकि मैं उसे पकड़ सकूं."
"जब यह सब कुछ घटित हो रहा था तो सुरक्षा गार्ड पनवाड़ी की दुकान पर हंसी-ठिठोली करते हुए गप्पे लगा रहा था. कोई भी उसे पकड़ने के लिए नहीं दौड़ा. कोई अपनी जगह से हिला भी नहीं."A security guard is happily talking to people near panwari while this happens. Nobody runs to catch him. None. Nada. Cipher.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"मेरे पापा ने जब यह सब देखा तो वे कार निकले और उसे पकड़ने के लिए दौड़े. वहां मौजूद लोग मूकदर्शक बने रहे. सब सिर्फ चौंकने का नाटक करते दिखे."My father sees this. Gets out of the car and runs behind the man. Everybody enjoys the show. Happily and acts surprised. Mind you: only act.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
'इसमें सबसे मजाकिया बात यह थी जब गार्ड ने मेरे पास आकर कहा- मैडम हमें क्यों नहीं बताया? उसने यह सब मेरे इतना चिल्लाने के बावजूद कहा. "Funiest part: Guard comes to me and says 'madame hume kyu ni bataya'. After I shouted my guts out. The audacity.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"बाकी लोगों ने कहा कि मैडम आप ये करती या वो करतीं. लेकिन वे ये नहीं समझ पाए जब कोई आप पर हमला करता है तो आपमें सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है. मुझसे जो भी अपने आपको बचाने के लिए बेस्ट हो सकता था, वो मैंने किया."Other people: Madame ye krtin, wo kartin.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
You losers, when somebody attacks you: you can't think. I did the best I could.
Moved out of this city an year back. I thank my starts I did. This has been the first time I've taken a metro in last six months and I'm sad
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
"मैंने साल भर पहले यह शहर छोड़ दिया था. पिछले 6 महीनों में मैंने पहली बार मेट्रो ली, जिसका मुझे दुख है. महिलाएं, आप सेफ नहीं हैं. अपनी मदद आप खुद कर सकती हैं, क्योंकि पुलिस और सिक्योरिटी सब दिखावा रह जाता है."So yes, ladies. You're not safe. Not even close. You're on your own and there are creeps ready to grope you. Police and security mean shit.
— Megha (@Omeghaa_) May 28, 2017
गौरतलब है कि 16 दिसंबर गैंगरेप के बाद दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून भी बनाए गए, लेकिन इतने साल बाद भी महिलाएं सार्वजनिक स्थलों पर भी सुरक्षित नहीं है. रोजमर्रा रेप, छेड़छाड़ और मर्डर की घटनाएं सुनने को मिलती रहती है.
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