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This Article is From Mar 03, 2011

आखिरकार हो गई सीवीसी थॉमस की छुट्टी

New Delhi: केंद्रीय सर्तकता आयुक्त (सीवीसी) के तौर पर पीजे थॉमस की नियुक्ति को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है, और इस फैसले के बाद थॉमस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि थॉमस की नियुक्ति को लेकर उच्चस्तरीय समिति ने जो अनुशंसाएं कीं, वे 'कानून के अनुरूप' नहीं हैं। न्यायालय के मुताबिक, समिति भले ही किसी भी कारण से, लेकिन थॉमस के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करने से संबंधित सामग्री पर विचार करने में असफल रही। न्यायालय ने सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वर्ष 2008 में सीवीसी की नियुक्ति के लिए सतर्कता विभाग ने जो मंजूरी दी थी, उसी को पद पर नियुक्ति के लिए बनी उम्मीदवार सूची में थॉमस के नाम को शामिल करने का आधार बनाया गया। न्यायालय ने कहा कि थॉमस के नाम की अनुशंसा करते हुए न समिति और न ही सरकार के किसी अधिकारी ने सीवीसी कार्यालय की संस्थागत ईमानदारी के व्यापक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। थॉमस केरल के वर्ष 1992 में हुए पामोलिन आयात घोटाले में आरोपी हैं, जिससे सरकार को 2.8 करोड़ रुपये का चूना लगा था। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि फैसले से सीवीसी के दफ्तर की गरिमा बची है। इससे पूर्व थॉमस मामले में चीफ जस्टिस एसएच कपाड़िया, जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने 10 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। उल्लेखनीय है कि थॉमस को पिछले साल 7 सितंबर को सीवीसी के तौर पर तैनात किया गया था, हालांकि उनकी नियुक्ति पर श्रीमती स्वराज ने एतराज़ जताया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखे सवालों या टिप्पणियों से सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया। उधर, अपनी दलील में थॉमस ने यह तर्क भी रखा था कि संसद में करीब 28 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, फिर भी वे कानून बनाने में भूमिका अदा कर रहे हैं तो उनकी तैनाती गलत क्यों।

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