नई दिल्ली:
सरकार ने गुरुवार को बताया कि चीन ने नई दिल्ली में 27 से 30 नवंबर 2011 को आयोजित विश्व बौद्ध धर्म संघ (जीबीसी) में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को शामिल होने से रोकने या जीबीसी को पूरी तरह रद्द कर देने का सुझाव दिया था। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने आज राज्यसभा में कहा कि चीनी पक्ष को सूचित किया गया कि सरकार जीबीसी में हस्तक्षेप नहीं करेगी क्योंकि यह सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि एक धार्मिक सम्मेलन है। उन्होंने रविशंकर प्रसाद और रामचंद्र प्रसाद सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत और चीन नवंबर 2011 में नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का 15 वां दौर आयोजित करने की संभावना का पता लगा रहे थे। इसके लिए 28 और 29 नवंबर की तारीख पर विचार शुरू हुआ। लेकिन यही तारीख जीबीसी की थी और इसका पता चलने पर चीनी पक्ष ने अपने विशेष प्रतिनिधि की बैठक के समय दलाई लामा के दिल्ली में उपस्थित रहने पर चिंता जताई थी। कृष्णा के अनुसार, सरकार ने विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराते हुए चीनी पक्ष को आश्वस्त किया कि जीबीसी जैसे किसी धार्मिक कार्यक्रम से सरकार का दूसरे देशों के साथ क्रियाकलापों और आदान प्रदान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन चीनी पक्ष ने दलाई लामा की नयी दिल्ली में उपस्थिति के दौरान अपने विशेष प्रतिनिधि के उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी। तब दोनों पक्षों ने विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता के 15 वें दौर के लिए जल्द ही सुविधाजनक तिथि तय करने का फैसला किया था।
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