निलंबित DSP देविंदर सिंह समेत 6 लोगों खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिये आरोप पत्र दायर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ''हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने'' की पाकिस्तान स्थित हिज्बुल मुजाहीदीन और पाकिस्तानी सरकारी एजेंसियों की गहरी साजिश का हिस्सा थे.

निलंबित DSP देविंदर सिंह समेत 6 लोगों खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिये आरोप पत्र दायर

जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह और हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर समेत छह लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोप पत्र दायर किया. (File pic)

जम्मू:

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित आतकंवादियों और दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सदस्यों की मदद से कथित रूप से ''''भारत के खिलाफ युद्ध'''' छेड़ने के लिये जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह और हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर समेत छह लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोप पत्र दायर किया. गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दायर किये गए 3,064 पन्नों के इस आरोप पत्र को जम्मू की एक अदालत में पेश किया गया, जिसमें आतंकी समूह हिज्बुल मुजाहिदीन के स्वयंभू कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ नवीद बाबू और उसके कथित नेटवर्क के साथियों को नामजद किया गया है. यदि अदालत में सभी आरोप सही साबित हुए तो आरोपियों को मृत्युदंड अथवा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है. इसके अलावा आरोप पत्र में नवीद बाबू के भाई सैयद इरफान अहमद, समूह के कथित भूमिगत कार्यकर्ता इरफान शफी मीर, उसके कथित साथी अहमद राठेर और नियंत्रण रेखा व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष कारोबारी तनवीर अहमद वानी को भी नामजद किया गया है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ''''हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने'''' की पाकिस्तान स्थित हिज्बुल मुजाहीदीन और पाकिस्तानी सरकारी एजेंसियों की गहरी साजिश का हिस्सा थे. एनआईए ने षड़यंत्र की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यहां जेल में बंद पुलिस उपाधीक्षक सिंह मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिये नयी दिल्ली में स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के कुछ अधिकारियों के साथ संपर्क में था. जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी अधिकारी उसे संवेदनशील सूचनाएं देने के लिये मना रहे थे.

आरोप पत्र में कहा गया है कि मामले में जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की आतंकवादी गतिविधियों के लिये सभी संभव रास्ते बनाने, वित्तीय मदद देने, हथियार मुहैया कराने जैसे काम कर रहे थे. आरोप पत्र में कहा गया है कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, उप प्रमुख आमिर खान, संचालन प्रमुख खुर्शीद महमूद और वित्त प्रमुख नजर महमूद समेत इसके ''''तथाकथित नेतृत्व'''' के अलावा पाकिस्तानी प्रतिष्ठान भी जम्मू-कश्मीर स्थित समूह के कैडर को मदद पहुंचा रहे थे. अधिकारियों ने कहा कि आरोप पत्र में 3,017 मौखिक और दस्तावेजी सबूत पेश किए गए हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सिंह को नवीद बाबू, राठेर और अधिवक्ता मीर के साथ इस साल 11 जनवरी को घाटी को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट काजीगुंड में उनकी कार रोककर गिरफ्तार किया था. वाहन की तलाशी लिये जाने पर उससे एक एके-47 राइफल, तीन पिस्तौल और विस्फोटक का जखीरा बरामद हुआ था. एनआईए ने 17 जनवरी को इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली थी.जांच में पाया गया कि सिंह ने पिछले साल नवीद बाबू को बचाने की कोशिश में उसे अधिवक्ता के साथ जम्मू भेजकर उनके लिये सुरक्षित पनाह की व्यवस्था की थी.

एनआईए का आरोप है कि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की आवाजाही के लिए सिंह ने अपने वाहन का इस्तेमाल किया और उन्हें हथियार खरीदने में मदद का भी आश्वासन दिया. एजेंसी ने कहा हथियारों के साथ पुलिस से भागा पूर्व कांस्टेबल नवीद बाबू कई लोगों की हत्या का जिम्मेदार है, जिनमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद मजदूरों और ट्रक चालकों पर हमले की वारदातें भी शामिल हैं.

आरोप पत्र में कहा गया है कि नवीद बाबू ने भोले-भाले युवकों को हिज्बुल मुजाहिदीन में भर्ती करने के प्रयास किए और वह "एलओसी व्यापारियों" से धन भी ले रहा था. आरोप पत्र में वानी पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित अन्य व्यापारियों की मदद से उसे धन मुहैया कराने का आरोप लगाया है.एनआईए ने कथित डबल एजेंट मीर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उसने हिज्बुल के शीर्ष नेतृत्व के अलावा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के उमर चीमा, अहसान चौधरी, सोहेल अब्बास और अन्य से मुलाकात की थी.

आरोप पत्र में कहा गया है कि उसे कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के वास्ते धन हस्तांतरित करने के लिए नए हवाला माध्यमों की पहचान करने और उन्हें सक्रिय करने का काम सौंपा गया था. एनआईए ने कहा कि मीर नयी दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के कुछ अधिकारियों के संपर्क में था. उन्होंने उसे जम्मू-कश्मीर की जनता को भारत सरकार के खिलाफ भड़काने के वास्ते सेमिनार आयोजित करने के लिए धन प्रदान किया.


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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)