
नई दिल्ली:
दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि अगर लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति दी गई या संपत्ति पर जबरन कब्जा लेने के लिए दूसरों के आवासीय परिसर में घुसने की अनुमति दी गई तो यह पूरे समाज के लिए कठिन होगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) संजीव जैन ने 27 साल पुराने मामले में तीन दोषियों को प्रोबेशन का लाभ देने से इंकार करते हुए कहा कि ये अपराध गंभीर प्रकृति के हैं और समाज के मन में डर पैदा करते हैं। तीनों दोषियों को अलग-अलग कारावास की सजा सुनाई गई थी।
न्यायाधीश ने कहा, 'अगर लोगों को अपने हाथों में कानून लेने की अनुमति दी गई या संपत्ति का जबरन कब्जा लेने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने के लिए दूसरों के आवास में घुसने की अनुमति दी गई तो यह पूरे समाज के लिए कठिन होगा।'
न्यायाधीश ने कहा, 'इस तरह के अपराध समाज में लोगों के मन में डर पैदा करते हैं। मेरी राय में ये अपराध गंभीर प्रकृति के हैं।' अदालत ने इस बात पर गौर किया कि तथ्य दोषियों के खिलाफ साबित हो गए कि वे अपनी समान मंशा के तहत जबरन महिला के घर में घुसे और तेज धार वाले हथियार से उस पर हमला किया।
दोषियों चंद्रमोहन (उत्तर प्रदेश निवासी), एस डी भंडारी और नाथी लाल (दोनों दिल्ली निवासी) द्वारा दायर अलग-अलग अपीलों को खारिज करते हुए अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि और सजा के फैसले को बरकरार रखा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) संजीव जैन ने 27 साल पुराने मामले में तीन दोषियों को प्रोबेशन का लाभ देने से इंकार करते हुए कहा कि ये अपराध गंभीर प्रकृति के हैं और समाज के मन में डर पैदा करते हैं। तीनों दोषियों को अलग-अलग कारावास की सजा सुनाई गई थी।
न्यायाधीश ने कहा, 'अगर लोगों को अपने हाथों में कानून लेने की अनुमति दी गई या संपत्ति का जबरन कब्जा लेने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने के लिए दूसरों के आवास में घुसने की अनुमति दी गई तो यह पूरे समाज के लिए कठिन होगा।'
न्यायाधीश ने कहा, 'इस तरह के अपराध समाज में लोगों के मन में डर पैदा करते हैं। मेरी राय में ये अपराध गंभीर प्रकृति के हैं।' अदालत ने इस बात पर गौर किया कि तथ्य दोषियों के खिलाफ साबित हो गए कि वे अपनी समान मंशा के तहत जबरन महिला के घर में घुसे और तेज धार वाले हथियार से उस पर हमला किया।
दोषियों चंद्रमोहन (उत्तर प्रदेश निवासी), एस डी भंडारी और नाथी लाल (दोनों दिल्ली निवासी) द्वारा दायर अलग-अलग अपीलों को खारिज करते हुए अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि और सजा के फैसले को बरकरार रखा।
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