जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर आज आरोप लगाया कि वह नरेंद्र मोदी पर से ‘ध्यान हटाने’ की कोशिश कर रही है, जिन्होंने राज्य के बाहर विवाह करने वाली महिलाओं के निवास संबंधी एक विधेयक को लेकर ‘जान-बूझकर या अनजाने में लोगों को गुमराह’ किया।
उमर उस दावे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें भाजपा ने कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तत्कालीन पीडीपी सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में लाए गए उस विधेयक का ‘पूरे जोश’ से समर्थन किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के बाहर विवाह करने वाली महिला का राज्य की स्थायी निवासी होने का दर्जा वापस लेने की बात की गई थी।
भाजपा नेता अरुण जेटली ने सोमवार को एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि पीडीपी ने 2002 में राज्य में सरकार बनाने के बाद ‘जम्मू-कश्मीर निवासी (अयोग्यता) विधेयक 2004’ पेश किया था, जिसे एनसी ने ‘उत्साहपूर्वक’ समर्थन किया था।
इसके बारे में उमर ने कई ट्वीट करके उत्तर देते हुए कहा, यह सच है कि एनसी ने कुछ वर्षों पहले एक विधेयक का समर्थन किया था, जिससे महिलाओं के प्रति भेदभाव जारी रहता। मैं इस बात का खंडन नहीं कर रहा।
उमर ने लिखा, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि पांच वर्ष के लिए सत्ता में आने के बाद एनसी ने इस विधेयक को फिर से लाने की कोई कोशिश नहीं की और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है। इस बात को भी झुठलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुद्दा यह नहीं था कि उनकी पार्टी क्या करती है या क्या नहीं करती लेकिन मोदी ने रविवार को जम्मू में अपनी रैली में ‘गलत’ तथ्य पेश किए थे और ‘अब भाजपा ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
उमर ने कहा, जेटली कुछ भी कहें, लेकिन यह सच्चाई है कि मोदी जान-बूझकर या अनजाने में इस मामले पर लोगों को गुमराह कर रहे थे और इसे झुठलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने साथ ही ट्वीट किया, टीवी कार्यक्रमों में अनुच्छेद 370 पर चर्चा करने वाले प्रिय स्वयंभू विशेषज्ञों आप कोई भी राय बनाने से पहले अनुच्छेद 370 के बारे में पढ़ लें। मोदी के संविधान के अनुच्छेद 370 पर बहस कराने की मांग करने के बाद से उमर और भाजपा के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है।
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