
शांता कुमार (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
विवादों में फंसे मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के इस्तीफ़े की विपक्ष की मांग का दबाव झेल रही केंद्र सरकार पर अब अपनों ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और फ़िलहाल कांगड़ा से बीजेपी सांसद शांता कुमार ने ऐसे मंत्रियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी लिखकर शांता कुमार ने राज्य और केंद्र में एथिक्स कमेटी के गठन की मांग की है जो भ्रष्टाचार के मामलों में लोकपाल की तरह काम करे।
शांता कुमार ने चिट्ठी में लिखा है कि हाल के आरोपों ने ज़मीनी कार्यकर्ताओं को शर्मसार किया है। पहले भी शांता कुमार ने गुजरात दंगों और बीएस येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर चिट्ठी लिख चुके हैं। 2003 में गुजरात दंगों पर बयान देने के बाद तत्कालीन वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद से उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था।
वहीं, बीजेपी की ओर से कहा गया है कि पार्टी के भीतर अनुशासन समिति है जो ऐसे मामले देखती है। पार्टी ने यह भी कहा है कि अभी तक एक भी घोटाला साबित नहीं हुआ है।
उधर शांता कुमार के बयान को पार्टी ने खारिज कर दिया है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा है कि शांता कुमार मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कांग्रेस के दुष्प्रचार के प्रभाव में आ गया है।
दरअसल शांता कुमार ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी में भ्रष्टाचार के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए राज्य और केंद्रीय इकाइयों में लोकपाल की तर्ज पर आचार समितियां बनाई जानी चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार के मामलों से पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। बीजेपी ने कहा है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है। शांता कुमार हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और फिलहाल कांगड़ा से बीजेपी सांसद हैं। शांता कुमार ने NDTV से बातचीत में कहा कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा है उसके हर एक शब्द के साथ वो मज़बूती से खड़े हैं।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और फ़िलहाल कांगड़ा से बीजेपी सांसद शांता कुमार ने ऐसे मंत्रियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी लिखकर शांता कुमार ने राज्य और केंद्र में एथिक्स कमेटी के गठन की मांग की है जो भ्रष्टाचार के मामलों में लोकपाल की तरह काम करे।
शांता कुमार ने चिट्ठी में लिखा है कि हाल के आरोपों ने ज़मीनी कार्यकर्ताओं को शर्मसार किया है। पहले भी शांता कुमार ने गुजरात दंगों और बीएस येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर चिट्ठी लिख चुके हैं। 2003 में गुजरात दंगों पर बयान देने के बाद तत्कालीन वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद से उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था।
वहीं, बीजेपी की ओर से कहा गया है कि पार्टी के भीतर अनुशासन समिति है जो ऐसे मामले देखती है। पार्टी ने यह भी कहा है कि अभी तक एक भी घोटाला साबित नहीं हुआ है।
उधर शांता कुमार के बयान को पार्टी ने खारिज कर दिया है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा है कि शांता कुमार मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कांग्रेस के दुष्प्रचार के प्रभाव में आ गया है।
दरअसल शांता कुमार ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी में भ्रष्टाचार के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए राज्य और केंद्रीय इकाइयों में लोकपाल की तर्ज पर आचार समितियां बनाई जानी चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार के मामलों से पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। बीजेपी ने कहा है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है। शांता कुमार हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और फिलहाल कांगड़ा से बीजेपी सांसद हैं। शांता कुमार ने NDTV से बातचीत में कहा कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा है उसके हर एक शब्द के साथ वो मज़बूती से खड़े हैं।
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