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This Article is From Sep 08, 2020

'मिले ना मिले हम' : चिराग पासवान के 'ढाई घर' वाले दांव के पीछे कौन?

 Bihar Vidhan Sabha Elections : बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी इस समय काफी चर्चा में है. एनडीए की सहयोगी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष के पिता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान लाइमलाइट में हैं.

'मिले ना मिले हम' : चिराग पासवान के 'ढाई घर' वाले दांव के पीछे कौन?
जमुई से सांसद हैं चिराग पासवान
नई दिल्ली:

 Bihar Assembly Elections : बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी इस समय काफी चर्चा में है. एनडीए की सहयोगी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष के पिता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान लाइमलाइट में हैं. दरअसल बिहार में एनडीए के नेता सीएम नीतीश कुमार हैं और उन्हीं की अगुवाई में चुनाव लड़ा जाएगा. इस बात का ऐलान गृहमंत्री अमित शाह कई महीनों पहले कर चुके हैं. इसी बीच महागठबंधन से रिश्ता तोड़ जीतनराम मांझी भी एनडीए में आने का ऐलान कर चुके हैं. जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' की राजनीति भी दलितों के आसपास ही है. जबकि एनडीए में एलजेपी इस वोटबैंक पर पहले ही दावा करती आई है. एलजेपी नेताओं का कहना है, 'सिर्फ एनडीए में आने का ऐलान कर देने से भर से जीतनराम मांझी गठबंधन का हिस्सा नहीं बन जाएंगे. जब बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी की बैठक होगी उसमें फैसला होगा और उनका वेलकम किया जाएगा तभी माना जाएगा कि वह एनडीए का हिस्सा हैं. अभी तो बयान आया है कि जेडीयू के साथ उन्होंने गठबंधन कर लिया है'. कुल मिलाकर चिराग की अगुवाई में एलजेपी नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल बैठी है. दिल्ली में हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि  लोक जनशक्ति पार्टी का गठबंधन JDU के साथ जारी रहेगा कि नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार संसदीय बोर्ड ने पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान को दे दिया है. विधानसभा चुनाव के लिए लोक जनशक्ति पार्टी 143 उम्मीदवारों की सूची संसदीय बोर्ड को देगी. JDU पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कालिदास वाले बयान को लेकर एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया.

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वहीं सूत्रों का कहना है कि एलजेपी को लगता है कि जीतनराम मांझी की वजह से उसका नुकसान हो है. दूसरी ओर चिराग ज्यादा से ज्यादा सीटों की साझेदारी चाहते हैं इसलिए यह दबाव डालने की कोशिश हो रही है. जबकि बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी खुद ही चाहती है कि एलजेपी एनडीए से बाहर चुनाव लड़ें. क्योंकि माना जा रहा है कि चिराग अपने प्रत्याशी बीजेपी के खिलाफ नहीं उतारेंगे लेकिन जेडीयू के खिलाफ जरूर उतारेंगे. अगर एलजेपी, जेडीयू की 10 सीटें भी कम कर देती है तो एनडीए में बीजेपी नीतीश पर हावी हो जाएगी. सवाल इस बात का है कि क्या चिराग पासवान बीजेपी की शह पाकर राजनीति की बिसात पर नीतीश कुमार के खिलाफ ढाई घर वाली चाल चल रहे हैं.

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भारतीय राजनीति में कई दशकों से सक्रिय अपने पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को संभालने का काम चिराग पासवान बखूबी कर रहे हैं. चिराग पासवान की कंप्‍यूटर साइंस में बी.टेक हैं. बॉलीवुड में 'मिले ना मिले हम' से इंट्री की थी. लेकिन बॉक्‍स ऑफिस पर सफलता नहीं मिल पाई. इसके बाद चिराग राजनीति में आ गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में में रामविलास पासवान ने अपने पुत्र चिराग पासवान की बातों पर भरोसा करते हुए एनडीए में शामिल होने का फैसला किया था. चिराग पासवान इस समय जमुई से सांसद हैं और इस समय कई संसदीय समितियों का भी हिस्सा हैं. 

चिराग के सामने चुनौती
1- बिहार विधानसभा चुनाव में एलजेपी को ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलाना.
2- एनडीए में  अपनी स्थिति मजबूत करना
3- दलितों के बीच पैठ उस तरह से बन नहीं पाई.
4- पार्टी का संगठन मजबूत करना.

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