
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल की फाइल फोटो
मुंबई:
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र के पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल और अन्य के खिलाफ 'मनी लाउंड्रिंग' के आरोपों में अपनी जांच के सिलसिले में राज्य के नासिक जिले में 55 करोड़ रुपये मूल्य की एक चीनी मिल और 290 एकड़ जमीन जब्त की है।
जांच एजेंसी ने भुजबल की कंपनी आर्मस्ट्रांग इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिकाना हक वाली दो परिसंपत्तियों के खिलाफ धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अस्थायी जब्ती आदेश जारी किया। आदेश में दोनों परिसंपित्तयों की कीमत 55 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ईडी ने फैक्टरी चलाए जाने पर निषेधाज्ञा भी जारी की है। इसकी पहचान गिरना शुगर मिल और और इससे लगी जमीन के रूप में की गई है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने अपनी जांच में पाया है कि 27 करोड़ रुपये की 'कम कीमत आंक कर' भुजबल की कंपनी ने मिल खरीदी थी और यह 2010 में कर्ज वसूली अधिकरण (डीआरटी) द्वारा की गई एक नीलामी के तहत खरीदी गई थी। उन्होंने बताया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा मनी लाउड्रिंग के जरिये जुटाए गए धन का इस्तेमाल इन दोनों परिसंपित्तयों की खरीद में किया गया।
इस मामले में ईडी द्वारा जारी किया गया यह चौथा जब्ती आदेश है और इसने इससे पहले ही 280 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल परिसंपत्ति जब्त की है।
गौरतलब है कि पीएमएलए कानून के तहत जब्ती आदेश का लक्ष्य आरोपी को अपने कथित अवैध धन से फायदा उठाने से वंचित करना है और आरोपी पक्ष 180 दिनों के अंदर सक्षम प्राधिकार के समक्ष आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं। भुजबल को उनके पूर्व सांसद भतीजे समीर के साथ इस मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल जेल में हैं।
एजेंसी ने पीएमएलए के तहत भुजबल और उनके बेटे पंकज तथा समीर के खिलाफ मुंबई पुलिस की एसीबी की प्राथमिकियों के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज की है, ताकि दिल्ली स्थित स्टेट गेस्ट हाउस महाराष्ट्र सदन के निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और कलीना भूमि हड़प मामले की जांच हो सके।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
जांच एजेंसी ने भुजबल की कंपनी आर्मस्ट्रांग इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिकाना हक वाली दो परिसंपत्तियों के खिलाफ धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अस्थायी जब्ती आदेश जारी किया। आदेश में दोनों परिसंपित्तयों की कीमत 55 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ईडी ने फैक्टरी चलाए जाने पर निषेधाज्ञा भी जारी की है। इसकी पहचान गिरना शुगर मिल और और इससे लगी जमीन के रूप में की गई है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने अपनी जांच में पाया है कि 27 करोड़ रुपये की 'कम कीमत आंक कर' भुजबल की कंपनी ने मिल खरीदी थी और यह 2010 में कर्ज वसूली अधिकरण (डीआरटी) द्वारा की गई एक नीलामी के तहत खरीदी गई थी। उन्होंने बताया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा मनी लाउड्रिंग के जरिये जुटाए गए धन का इस्तेमाल इन दोनों परिसंपित्तयों की खरीद में किया गया।
इस मामले में ईडी द्वारा जारी किया गया यह चौथा जब्ती आदेश है और इसने इससे पहले ही 280 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल परिसंपत्ति जब्त की है।
गौरतलब है कि पीएमएलए कानून के तहत जब्ती आदेश का लक्ष्य आरोपी को अपने कथित अवैध धन से फायदा उठाने से वंचित करना है और आरोपी पक्ष 180 दिनों के अंदर सक्षम प्राधिकार के समक्ष आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं। भुजबल को उनके पूर्व सांसद भतीजे समीर के साथ इस मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल जेल में हैं।
एजेंसी ने पीएमएलए के तहत भुजबल और उनके बेटे पंकज तथा समीर के खिलाफ मुंबई पुलिस की एसीबी की प्राथमिकियों के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज की है, ताकि दिल्ली स्थित स्टेट गेस्ट हाउस महाराष्ट्र सदन के निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और कलीना भूमि हड़प मामले की जांच हो सके।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
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