
नई दिल्ली:
केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन के रेपो रेट में कटौती के ऐलान के बाद दलाल स्ट्रीट में मातम छाने लगा। 200 पॉइंट से लेकर 600 अंक तक और फिर आखिर में यह 661 अंक गिरकर 27,188 पर बंद हुआ। शेयर बाजार के लुढ़कने की वजह यह भी है आज सरकार की ओर से मॉनसून को लेकर दुखद भविष्यवाणी की गई है। यह दुखद इस मायने में है कि इसका सीधा असर हमारे रोजमर्रा के जीवन पर तो पड़ेगा ही बल्कि देश के सकल उत्पाद के आंकड़ों पर भी पड़ेगा। आज यानी मंगलवार दोपहर बाद ही विज्ञान प्रोद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि 93% की जगह 88% बारिश का अनुमान है।
मौद्रिक नीति की समीक्षा, शेयर बाजार की उठापटक और सामान्य से कम मॉनसून के फोरकास्ट के बहाने आपको बताएं कि लगातार दूसरे साल भी यदि कम बारिश होती है तो अर्थव्यवस्था का इस क्या असर पड़ेगा:
मुद्रास्फीति पर असर
जब सामान्य से कम बारिश होगी तब खाने पीने के दामों में इजाफा होगा। खासतौर से फलों, सब्जियों, दूध और दूध से बने पदार्थ, मीट-मछली-अंडा के दाम तेजी से बढ़ेंगे। हालांकि अनाज के दामों में अधिक बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अनाज पैदा करने वाले राज्यों में अच्छी फसल हुई है। खाने-पीने की चीजों के दामों में इजाफा होने के चलते ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी वृद्धि होगी। यह 30 बीपीएस तक हो सकती है।
प्रतिदिन के उपभोग पर असर
खाने-पीने की चीजों पर खर्च बढ़ने का सीधा सा अर्थ यह है कि लोगों की प्रयोग के लिए उपलब्ध आमदनी में कमी होगी और चीजों का उपभोग घटेगा। साथ ही साथ अर्थव्यवस्था के कुछ खास सेक्टर्स की इनपुट या यूं कहें कि लागत की कॉस्ट भी बढ़ेगी। लगातार साल दर साल मॉनसून का सामन्य से कम होना ग्रामीण इलाकों के उपभोग पर भी असर डालेगा। ग्राउंड वाटर कम होते जाने से सिंचाई प्रणाली प्रभावित होगी। कम बारिश की वजह से कम पैदावार होने के चलते सरकार को एमएसपी में इजाफा करना होगा, ताकि ग्रामीण भारत में सामान्य से कम मॉनसून का विपरीत प्रभाव कम से कम हो सके।
जीडीपी ग्रोथ पर असर
अब बात करें जीडीपी ग्रोथ यानी सकल घरेल उत्पाद में वृद्धि की। सामान्य से कम मॉनसून का सीधा सा असर कृषि संबंधी वृद्धि दर पर पड़ेगा। खराब कृषि संबंधी वृद्धि दर के साथ मुद्रास्फीति के अत्याधिक होने, इनपुट प्राइसेस में इजाफा होने और उपभोग में कमी आने से देश की जीडीपी वृद्धि दर सीधे तौर पर प्रभावित होगी। 2015-16 वित्तीय वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मॉनसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान और उसके असर के चलते इसके 30-40 बीपीएस तक लुढ़क जाने की आशंका है।
मौद्रिक नीति की समीक्षा, शेयर बाजार की उठापटक और सामान्य से कम मॉनसून के फोरकास्ट के बहाने आपको बताएं कि लगातार दूसरे साल भी यदि कम बारिश होती है तो अर्थव्यवस्था का इस क्या असर पड़ेगा:
मुद्रास्फीति पर असर
जब सामान्य से कम बारिश होगी तब खाने पीने के दामों में इजाफा होगा। खासतौर से फलों, सब्जियों, दूध और दूध से बने पदार्थ, मीट-मछली-अंडा के दाम तेजी से बढ़ेंगे। हालांकि अनाज के दामों में अधिक बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अनाज पैदा करने वाले राज्यों में अच्छी फसल हुई है। खाने-पीने की चीजों के दामों में इजाफा होने के चलते ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी वृद्धि होगी। यह 30 बीपीएस तक हो सकती है।
प्रतिदिन के उपभोग पर असर
खाने-पीने की चीजों पर खर्च बढ़ने का सीधा सा अर्थ यह है कि लोगों की प्रयोग के लिए उपलब्ध आमदनी में कमी होगी और चीजों का उपभोग घटेगा। साथ ही साथ अर्थव्यवस्था के कुछ खास सेक्टर्स की इनपुट या यूं कहें कि लागत की कॉस्ट भी बढ़ेगी। लगातार साल दर साल मॉनसून का सामन्य से कम होना ग्रामीण इलाकों के उपभोग पर भी असर डालेगा। ग्राउंड वाटर कम होते जाने से सिंचाई प्रणाली प्रभावित होगी। कम बारिश की वजह से कम पैदावार होने के चलते सरकार को एमएसपी में इजाफा करना होगा, ताकि ग्रामीण भारत में सामान्य से कम मॉनसून का विपरीत प्रभाव कम से कम हो सके।
जीडीपी ग्रोथ पर असर
अब बात करें जीडीपी ग्रोथ यानी सकल घरेल उत्पाद में वृद्धि की। सामान्य से कम मॉनसून का सीधा सा असर कृषि संबंधी वृद्धि दर पर पड़ेगा। खराब कृषि संबंधी वृद्धि दर के साथ मुद्रास्फीति के अत्याधिक होने, इनपुट प्राइसेस में इजाफा होने और उपभोग में कमी आने से देश की जीडीपी वृद्धि दर सीधे तौर पर प्रभावित होगी। 2015-16 वित्तीय वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मॉनसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान और उसके असर के चलते इसके 30-40 बीपीएस तक लुढ़क जाने की आशंका है।