यूनिटेक संस्थापक रमेश चंद्रा और उनके बेटों पर बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज, CBI करेगी जांच

CBI Case Unitech : केनरा बैंक ने फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया है कि 2007 से 2010 के बीच यूनिटेक की तीन सहयोगी कंपनियों ने साइप्रस की 10 कंपनियों में करीब 1745.81 करोड़ का निवेश किया.

यूनिटेक संस्थापक रमेश चंद्रा और उनके बेटों पर बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज, CBI करेगी जांच

Unitech 74 परियोजनाओं को पूरा नहीं कर सकी, जिनमें करीब 17 हजार करोड़ रुपये निवेशित था.

नई दिल्ली:

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI ) ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड (Unitech Limited) के संस्थापक रमेश चंद्रा और उनके दो बेटों संजय और अजय चंद्रा के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. इन तीनों पर केनरा बैंक (Canara Bank) से 198 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी Bank Fraud) करने का आरोप है. बैंक ने पिछले माह दायर अपनी शिकायत में कहा था कि यूनिटेक 1971 से ही उसकी ग्राहक है और इस दौरान कई बार उसने कर्ज लिया है, लेकिन हाल ही में उसने कई बार समय पर कर्ज नहीं चुकाकर डिफॉल्ट किया. 

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शिकायत में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit)  से पता चला है कि यूनिटेक ने 29,800 घर खरीदारों (Home Buyers) से 14,270 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे. हालांकि इनमें से 5036 करोड़ रुपया 74 प्रस्तावित आवासीय परियोजनाओं (Real Estate Projects) में नहीं लगाया गया. ऑडिट से यह जानकारी भी सामने आई कि यूनिटेक ने केनरा बैंक (Canara Bank) समेत छह वित्तीय संस्थानों से 1805 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इसमें से 763 करोड़ रुपये का सही इस्तेमाल नहीं किया गया.

यह जानकारी भी सामने आई कि वर्ष 2007 से 2010 के बीच यूनिटेक (Unitech Limited) की सहायक कंपनियों ने साइप्रस में दस कंपनियों में करीब 1745.81 करोड़ रुपये का निवेश किया था. केनरा बैंक ने आरोप लगाया कि यूनिटेक ने अमानत में खयानत के साथ गैरकानूनी तरीके से थर्ड पार्टी राइट्स हासिल कर लिया. इस तरह से धन का निजी कार्यों में इस्तेमाल किया गया.

यूनिटेक 74 परियोजनाओं को पूरा नहीं कर सकी, जिनमें करीब 17 हजार करोड़ रुपये निवेशित था. इससे हजारों घर खरीदार दशकों से अपना आशियाना पाने को भटक रहे हैं. इस साल जनवरी में घर खरीदारों (Home Buyers)को थोड़ी राहत मिली जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने कंपनी के प्रबंधन का नियंत्रण सरकार को सौंप दिया, जिसने नया बोर्ड गठित करने के साथ निदेशकों को नामित किया. पूर्व आईएएस यदुवीर सिंह मलिक को इसका चेयरमैन और एमडी बनाया गया है.


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