New Delhi:
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने संसद की स्थायी समिति की ओर से सौंपी गई लोकपाल रिपोर्ट पर संसद की भावना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। अन्ना हजारे के एकदिवसीय सांकेतिक अनशन के मौके पर पहुंचे जेटली ने कहा, अन्ना जी ने जब अपना पिछला अनशन तोड़ा था, तो उस समय संसद के दोनों सदनों ने अपनी भावना प्रदर्शित की थी। जिसमें राज्यों के अंदर लोकायुक्त की नियुक्ति, सिटिजन चार्टर, निचले स्तर की अफसरशाही को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा, यह देश से किया वादा तोड़ने वाली बात है। पूरी संसद ने जो वादा किया, उसे कैसे तोड़ा जा सकता है। जेटली ने कहा, संसदीय लोकतंत्र में जनता की भी आवाज है। कानून बेशक संसद में बनता है, लेकिन जनमत भी एक चीज होती है। उन्होंने कहा कि हर कोई मतबूत और प्रभावी लोकपाल की बात कर रहा है। इससे जुड़े कुछ विषयों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन लोकपाल की जो आत्मा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जेटली ने कहा, स्थायी समिति में हमारे दल के जो सदस्य थे, उन्होंने असहमति के नोट के साथ अपने विचार रखे हैं। हमारी राय स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने चाहिए और केवल ग्रुप 'ए' और 'बी' के अधिकारी इसके दायरे में हों और 'सी' और 'डी' ग्रपु के अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाएगा, इसे हम स्वीकार करने वाले नहीं हैं। जेटली ने स्वीकार किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का दुरूपयोग होता रहा है, इसलिए इस संस्था को निष्पक्ष बनाया जाना चाहिए, ताकि वह सरकारों के हाथों का खिलौना ना रहे। सीबीआई को भी लोकपाल के दायरे में रख जाना चाहिए।
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
अरुण जेटली, लोकपाल बिल, अन्ना हजारे, जंतर-मंतर