New Delhi:
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के अनशन का शनिवार को 12वां दिन है। डॉक्टर जहां उन्हें कमजोर बता रहे हैं, वहीं अन्ना ने मंच से अपने समर्थकों से कहा कि उन्हें कोई थकावट नहीं है और वह और चार-पांच दिन अनशन कर सकते हैं। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर 16 अगस्त से ही अनशन पर हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में उनका भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन जारी है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वह खुद के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं और निस्वार्थ होकर देशवासियों के लिए काम कर रहे हैं, इसीलिए उन्हें कोई थकान नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चार-पांच दिन और अनशन कर सकते हैं। अन्ना ने कहा कि जब वह समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर उनके समर्थन में देशभर में लोगों द्वारा किए जा रहे धरना-प्रदर्शनों के विषय में पढ़ते या देखते हैं तो उन्हें लगता है कि उनके जैसे साधारण आदमी को इतना समर्थन क्यों मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे गीता की 'यदा-यदा ही धर्मस्य..' पंक्तियां याद आती हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है वह ईश्वर ही कर रहा है और वह तो सिर्फ निमित्त हैं।25 अगस्त को रात आठ बजे से अपने समर्थकों को संबोधित नहीं करने वाले हजारे शनिवार सुबह करीब 10 बजे समर्थकों की ओर से भारत माता की जय वंदे मातरम् और इंकलाब जिन्दाबाद की जोरदार नारेबाजी के बीच मंच पर आए। रामलीला मैदान में अनशन कर रहे गांधीवादी ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, मैं यह अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं कर रहा हूं। यदि ऐसा होता, तो मैं पांच दिन भी नहीं टिक पाता। जन लोकपाल विधेयक पारित होने तक मेरा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने पांच मिनट के अपने संबोधन में कहा कि उन्हें उद्देश्य के समर्थन में आने वालों से ऊर्जा मिल रही है और यह ऊर्जा उन्हें तीन-चार दिन तक और अनशन करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, जब तक जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं होता, मैं नहीं मरूंगा। हजारे ने कहा कि जिस तरह से उनके आह्वान पर सारा देश एकजुट हो गया, उसे देखकर वह आश्चर्यचकित हैं। यह बात उन्होंने एक व्यक्ति का हवाला देते हुए कही, जिसके कंधे पर यह लिखा टैटू था कि वह गांधीवादी का समर्थक है। उन्होंने कहा, मैं आश्चर्यचकित हूं कि एक फकीर को इस तरह का समर्थन मिल रहा है। यह मैं नहीं हूं, जो यह सब कर रहा है। मुझ पर भगवान का आशीर्वाद है। यह वह (ईश्वर) है जो सब कुछ कर रहा है। मैं जो कुछ कर रहा हूं, उसकी तारीफ की जा रही है। एक फकीर की इतनी ज्यादा तारीफ नहीं की जानी चाहिए।
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