
अमेरिका ने पिछले महीने ही हिजबुल के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था
नई दिल्ली:
हिजबुल मुजाहिदीन को अमेरिका ने एक आतंकी संगठन घोषित करते हुए उसे प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है. आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे अभियान की यह एक बड़ी सफलता माना जा रहा है. इससे पहले भी अमेरिका ने पाकिस्तानी हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था.
अमेरिका के इस कदम का भारत ने स्वागत करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई और मजबूत हो रही है तथा आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के हौसले पस्त हो रहे हैं. अमेरिका के इस कदम से इस लड़ाई को और ज्यादा बल मिलेगा.
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, ‘हिज्बुल मुजाहिदीन को आतंकी हमले करने के लिए संसाधनों से उपेक्षित करने के प्रयास के तहत उसे आतंकी समूह घोषित किया गया है.’ इस फैसले के बाद अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली हिज्बुल की सभी संपत्तियों और संपत्ति से जुड़े उसके हितों पर रोक लग जाएगी तथा अमेरिका का कोई भी व्यक्ति इस समूह के साथ किसी तरह का लेनदेन नहीं कर सकेगा. विदेश विभाग ने कहा कि आतंकवाद से जुड़ा घोषित होने से संगठन और व्यक्ति बेनकाब होते हैं तथा अलग-थलग पड़ जाते हैं और अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उनकी पहुंच खत्म हो जाती है. इसके साथ ही इस कदम से अमेरिका और दूसरी सरकारों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मदद मिलती है.
यह भी पढ़ें: सलाहुद्दीन को आतंकी नहीं मानता पाकिस्तान, कहा- ट्रंप ने भारत को खुश करने के लिए घोषणा की
भारत सरकार की कोशिशों के चलते अमेरिका लगातार आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़े फैसले ले रहा है. जुलाई माह के अंत में अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था. और यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के कुछ घंटे पहले ही की गई थी.
यह भी पढ़ें: हिज्बुल सरगना सलाहुद्दीन के पाकिस्तानी टीवी को दिए इंटरव्यू से फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान
सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हिजबुल मुजाहिदीन के एक बड़े नेता के तौर पर सलाहुद्दीन या सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह ने सितम्बर 2016 में कश्मीर मुद्दे के किसी भी शांतिपूर्ण समाधान को बाधित करने की कसम खायी थी. उसने और कश्मीरी आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षित करने और कश्मीर घाटी को भारतीय बलों की कब्रगाह बनाने की कसम खायी थी.
यह भी पढ़ें: हिजबुल कमांडर सब्जार भट के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद तनाव के बीच कश्मीर घाटी में कर्फ्यू
बता दें कि हिजबुल मुजाहिदीन अप्रैल, 1990 में अस्तित्व में आया एक अलगाववादी संगठन है. इसका गठन मुहम्मद एहसान डार ने किया था. यह संगठन कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता है. हालांकि भारतीय सेना समय-समय पर इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी कमर तोड़ने का काम करती रहती है, लेकिन पाकिस्तान से मिलने वाली मदद से यह संगठन फिर से उठ खड़ा होता है.
VIDEO: अमेरिका ने सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल आतंकी घोषित किया
पिछले हफ्ते ही सेना ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर यासीन इट्टू को एक मुठभेड़ में मार गिराया था. इट्टू की मौत के बाद मोहम्मद बिन कासिम को इस संगठन का नया सरगना बनाया गया है.
अमेरिका के इस कदम का भारत ने स्वागत करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई और मजबूत हो रही है तथा आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के हौसले पस्त हो रहे हैं. अमेरिका के इस कदम से इस लड़ाई को और ज्यादा बल मिलेगा.
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, ‘हिज्बुल मुजाहिदीन को आतंकी हमले करने के लिए संसाधनों से उपेक्षित करने के प्रयास के तहत उसे आतंकी समूह घोषित किया गया है.’ इस फैसले के बाद अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली हिज्बुल की सभी संपत्तियों और संपत्ति से जुड़े उसके हितों पर रोक लग जाएगी तथा अमेरिका का कोई भी व्यक्ति इस समूह के साथ किसी तरह का लेनदेन नहीं कर सकेगा. विदेश विभाग ने कहा कि आतंकवाद से जुड़ा घोषित होने से संगठन और व्यक्ति बेनकाब होते हैं तथा अलग-थलग पड़ जाते हैं और अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उनकी पहुंच खत्म हो जाती है. इसके साथ ही इस कदम से अमेरिका और दूसरी सरकारों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मदद मिलती है.
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भारत सरकार की कोशिशों के चलते अमेरिका लगातार आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़े फैसले ले रहा है. जुलाई माह के अंत में अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था. और यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के कुछ घंटे पहले ही की गई थी.
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सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हिजबुल मुजाहिदीन के एक बड़े नेता के तौर पर सलाहुद्दीन या सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह ने सितम्बर 2016 में कश्मीर मुद्दे के किसी भी शांतिपूर्ण समाधान को बाधित करने की कसम खायी थी. उसने और कश्मीरी आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षित करने और कश्मीर घाटी को भारतीय बलों की कब्रगाह बनाने की कसम खायी थी.
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बता दें कि हिजबुल मुजाहिदीन अप्रैल, 1990 में अस्तित्व में आया एक अलगाववादी संगठन है. इसका गठन मुहम्मद एहसान डार ने किया था. यह संगठन कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता है. हालांकि भारतीय सेना समय-समय पर इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी कमर तोड़ने का काम करती रहती है, लेकिन पाकिस्तान से मिलने वाली मदद से यह संगठन फिर से उठ खड़ा होता है.
VIDEO: अमेरिका ने सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल आतंकी घोषित किया
पिछले हफ्ते ही सेना ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर यासीन इट्टू को एक मुठभेड़ में मार गिराया था. इट्टू की मौत के बाद मोहम्मद बिन कासिम को इस संगठन का नया सरगना बनाया गया है.
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