अजित पवार के इस बयान से महाराष्ट्र-कर्नाटक में घमासान, येदियुरप्पा बोले- ये बयानबाजी गलत

महाराष्ट्र (Maharashtra) के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) के बयान से महाराष्ट्र और कर्नाटक (Karnataka) सरकार में जुबानी जंग तेज हो गई है.

अजित पवार के इस बयान से महाराष्ट्र-कर्नाटक में घमासान, येदियुरप्पा बोले- ये बयानबाजी गलत

बीएस येदियुरप्पा ने अजित पवार के बयान की निंदा की. (फाइल फोटो)

बेंगलुरु:

महाराष्ट्र (Maharashtra) के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) के बयान से महाराष्ट्र और कर्नाटक (Karnataka) सरकार में जुबानी जंग तेज हो गई है. पवार ने मंगलवार को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे (Bal Thackeray) की पुण्यतिथि पर दोनों राज्यों की सीमा से सटे जिलों बेलगावी, करवर और निपाणी को लेकर बयान दिया था. जिसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने उनके बयान की निंदा की और कहा कि इस तरह की बयानबाजी सरासर गलत है.

CM बीएस येदियुरप्पा ने कहा, 'मैं महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के बयान की निंदा करता हूं. दुनिया जानती है कि महाजन समिति की रिपोर्ट में अंततः क्या फैसला हुआ था. इस तरह की बयानबाजी गलत है.' कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी ने भी पवार के बयान को खारिज किया. उन्होंने कहा, 'हमें महाजन समिति की रिपोर्ट पर पूरा भरोसा है जिसके अनुसार, बेलगावी कर्नाटक का हिस्सा है. हम अजित पवार के बयान की निंदा करते हैं. हम निश्चित तौर पर इस मामले में चिट्ठी लिखेंगे.'

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अजित पवार ने बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए कहा था, 'महाराष्ट्र के महान नेतृत्व को मेरी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि. दिवंगत बालासाहेब ने अपने नेतृत्व, कर्म और बयानबाजी के बल पर मराठी समाज पर हमेशा के लिए शासन किया. उन्होंने अपना सारा जीवन महाराष्ट्र की गरिमा, मराठी लोगों की गरिमा और आम लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए न्योछावर कर दिया. उनका सपना था महाराष्ट्र की समग्र प्रगति और बेलगाम, करवर और निपाणी के साथ एकजुट महाराष्ट्र की स्थापना हो. आइए, बालासाहेब के इस सपने को पूरा करने का संकल्प लेते हैं.'

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बता दें कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के सीमा से सटे जिलों से जुड़ा यह विवाद दशकों पुराना है. इस विवाद को सुलझाने के लिए साल 1966 में एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मेहर चंद महाजन इस कमेटी के सदस्य थे. 1972 में संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में महाजन ने महाराष्ट्र के उस दावे को खारिज किया था, जिसमें राज्य ने बेलगाम (अब बेलगावी) को अपना हिस्सा बताया था. कर्नाटक विधानसभा का सत्र बेलगावी में भी आयोजित किया जाता है.


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