रेसिस्टेंस फ़ोर्स के नेता देश छोड़ कर भाग चुके हैं : तालिबान ने NDTV से कहा

तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, लेकिन पंजशीर में उसे रेसिस्टेंस फ़ोर्स की ओर से कड़ा मुकाबला मिला है.

नई दिल्ली:

अफगानिस्तान में रेसिस्टेंस फ़ोर्स से कड़ा मुकाबले का सामने कर रहे तालिबान के एक मीडिया प्रतिनिधि ने कहा कि रेसिस्टेंस आंदोलन का नेतृत्व पंजशीर में नहीं, बल्कि तुर्की में है. यह बयान पंजशीर पर तालिबान के कब्जे के दावे और उसके बाद रेसिस्टेंस फ़ोर्स जवाबी बयान के कुछ घंटे बाद आया है. बता दें, तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, लेकिन पंजशीर में उसे रेसिस्टेंस फ़ोर्स की ओर से कड़ा मुकाबला मिला है, यह घाटी तालिबान विरोधियों का गढ़ है.

तालिबान के आधिकारिक समाचार चैनल Alemarah के पत्रकार तारिक गजनीवाल ने कहा, 'पंजशीर में इंटरनेट नहीं है. वह (अहमद मसूद) वहां से ऑनलाइन कैसे पोस्ट कर रहा है? अहमद मसूद तुर्की में है.;

गजनीवाल (जिसे अब्दुल वाहिद रेयान ने नाम से भी जाना जाता है) ने आज एनडीटीवी को बताया, 'पंजशीर एक जिला है. इसे हम लोगों ने घेर रखा है. हमारे पास ड्रोन हैं, लेकिन हमने वहां उनका इस्तेमाल नहीं किया. हमने उन्हें मजहर में इस्तेमाल किया. मीडिया अफगानिस्तान में दिलचस्पी नहीं ले रहा था, इसलिए इसकी सीमित जानकारी है.'

पंजशीर घाटी काबुल से लगभग 90 मील उत्तर में हिंदू कुश पहाड़ों में स्थित है. 15 अगस्त को तालिबान के कब्जे के बाद से यह विरोधियों का गढ़ बना हुआ है. यहां पर पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के नेतृत्व में सेनाएं तालिबान लड़ाकाओं का मुकाबला कर रही हैं. 

तालिबान ने सोमवार को दावा किया था कि उन्होंने पंजशीर घाटी की लड़ाई जीत ली है.

'हमने अफगानिस्तान के बाकी हिस्सों की तरह बात करने और उन्हें साथ ले जाने की कोशिश की. लेकिन पंजशीर में कुछ लोग तैयार नहीं थे. उन्हें बाहर के लोगों ने भड़का रखा है. हमने 15 दिनों तक इंतजार किया. हमारे मुजाहिदीन गेट के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं माने. इसलिए हमें हमला करने के लिए मजबूर होना पड़ा," गजनीवाल ने कहा

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अफगानिस्तान में तालिबान क्यों नहीं बना पा रहा सरकार?