
नई दिल्ली:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। मुलकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा अधूरी रही।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा का चुनावी चेहरा बनाए जाने के बाद पार्टी में हुई प्रतिक्रिया को लेकर आडवाणी-भागवत की चर्चा अधूरी रही क्योंकि संघ ने कहा कि कई मुद्दों पर और विमर्श की जरूरत है।
भाजपा की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष के रूप में मोदी के उन्नयन के बाद पार्टी नेताओं पर निजी एजेंडे को तरजीह देने का आरोप लगाने वाले आडवाणी ने इसके बाद पहली बार भागवत से मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच नई दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय केशवकुंज में यह मुलाकात हुई जो करीब एक घंटे तक चली।
संघ की ओर से जारी बयान में आडवाणी से हुई मुलाकात को विस्तृत और स्पष्ट बताया गया है और कहा गया है कि भाजपा नेता ने देश के विभिन्न घटनाक्रमों, पार्टी की भूमिका और संघ के नेतृत्व में व्यापक राष्ट्रवादी आंदोलन पर अपने विचार रखे।
बयान में कहा गया है, "यह तय किया गया कि कई मुद्दों पर आगे चर्चा और विभिन्न स्तरों पर टिप्पणियों के आदान-प्रदान की जरूरत है जिसे उपयुक्त अवसर आने पर उठाया जाएगा।"
बयान में आगे कहा गया है, "भागवतजी ने यह भी सुझाव दिया कि विचारों का ऐसा उपयोगी अदान-प्रदान भविष्य में भी जारी रहना चाहिए।"
आडवाणी और भागवत की मुलाकात बुधवार को ही होने वाली थी। लेकिन आडवाणी के बीमार होने के कारण यह मुलाकात नहीं हो पाई थी। आडवाणी और भागवत के बीच पिछले सप्ताह टेलीफोन पर चर्चा हुई थी जिसमें भागवत ने उन्हें पार्टी पर इस्तीफा स्वीकार करने का दबाव नहीं डालने का सुझाव दिया था।
मोदी को अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा प्रचार समिति की कमान सौंपे जाने के बाद आडवाणी ने 10 जून को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में आडवाणी ने कहा था कि पार्टी के कुछ नेता अपने व्यक्तिगत एजेंडे को तवज्जो दे रहे हैं। बाद में भागवत के समझाने पर उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया था।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा का चुनावी चेहरा बनाए जाने के बाद पार्टी में हुई प्रतिक्रिया को लेकर आडवाणी-भागवत की चर्चा अधूरी रही क्योंकि संघ ने कहा कि कई मुद्दों पर और विमर्श की जरूरत है।
भाजपा की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष के रूप में मोदी के उन्नयन के बाद पार्टी नेताओं पर निजी एजेंडे को तरजीह देने का आरोप लगाने वाले आडवाणी ने इसके बाद पहली बार भागवत से मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच नई दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय केशवकुंज में यह मुलाकात हुई जो करीब एक घंटे तक चली।
संघ की ओर से जारी बयान में आडवाणी से हुई मुलाकात को विस्तृत और स्पष्ट बताया गया है और कहा गया है कि भाजपा नेता ने देश के विभिन्न घटनाक्रमों, पार्टी की भूमिका और संघ के नेतृत्व में व्यापक राष्ट्रवादी आंदोलन पर अपने विचार रखे।
बयान में कहा गया है, "यह तय किया गया कि कई मुद्दों पर आगे चर्चा और विभिन्न स्तरों पर टिप्पणियों के आदान-प्रदान की जरूरत है जिसे उपयुक्त अवसर आने पर उठाया जाएगा।"
बयान में आगे कहा गया है, "भागवतजी ने यह भी सुझाव दिया कि विचारों का ऐसा उपयोगी अदान-प्रदान भविष्य में भी जारी रहना चाहिए।"
आडवाणी और भागवत की मुलाकात बुधवार को ही होने वाली थी। लेकिन आडवाणी के बीमार होने के कारण यह मुलाकात नहीं हो पाई थी। आडवाणी और भागवत के बीच पिछले सप्ताह टेलीफोन पर चर्चा हुई थी जिसमें भागवत ने उन्हें पार्टी पर इस्तीफा स्वीकार करने का दबाव नहीं डालने का सुझाव दिया था।
मोदी को अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा प्रचार समिति की कमान सौंपे जाने के बाद आडवाणी ने 10 जून को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में आडवाणी ने कहा था कि पार्टी के कुछ नेता अपने व्यक्तिगत एजेंडे को तवज्जो दे रहे हैं। बाद में भागवत के समझाने पर उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया था।
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