बंगाल में लोकसभा चुनाव के नतीजों के हिसाब से टीएमसी 171 और बीजेपी को 116 सीटों पर बढ़त

ममता को 2016 में 209 सीटें और जीजेएम को दो सीटें मिली थीं. जबकि कांग्रेस को 23, सीपीएम को 19 सीटें मिली थीं. बीजेपी को 3 सीटें मिली थीं. हालांकि टीएमसी, कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन, बीजेपी के अलावा एआईएमआईएम भी मैदान में हैं. 

बंगाल में लोकसभा चुनाव के नतीजों के हिसाब से टीएमसी 171 और बीजेपी को 116 सीटों पर बढ़त

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, लेकिन सबकी निगाहें बंगाल में है. बीजेपी यहीं सबसे ज्यादा जोर लगा रही है. पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को 22 और बीजेपी को 18 सीटें मिली थीं. अगर 2019 के नतीजों को विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए तो तृणमूल को 171 और बीजेपी को 116 सीटों पर बढ़त मिली थी. दो लोकसभा सीट जीतने वाली कांग्रेस को 7 सीटों पर बढ़त होती. 

पश्चिम बंगाल में 2011 से ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी की सरकार है. तमिलनाडु में ईके पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके सरकार फिर वापसी की कोशिश करेगी.असम में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार चल रही है. केरल में एलडीएफ और यूडीएफ की बारी-बारी से सरकार आती है, देखना होगा कि इस बार क्या होगा. पुदुच्चेरी में वी. नारायणसामी की सरकार चुनाव के कुछ महीने पहले ही गिर गई है. यहां 25 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को इस बार गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के दोनों गुटों का समर्थन मिल रहा है. ममता को 2016 में 209 सीटें और जीजेएम को दो सीटें मिली थीं. जबकि कांग्रेस को 23, सीपीएम को 19 सीटें मिली थीं. बीजेपी को 3 सीटें मिली थीं. हालांकि टीएमसी, कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन, बीजेपी के अलावा एआईएमआईएम भी मैदान में हैं. 

पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को 22 और बीजेपी को 18 सीटें मिली थीं. अगर 2019 के नतीजों को विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए तो तृणमूल को 171 और बीजेपी को 116 सीटों पर बढ़त मिली थी. जबकि दो लोकसभा सीट जीतने वाली कांग्रेस को 7 सीटों पर बढ़त होती. 

तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके, बीजेपी और पीएमके का गठबंधन था. जबकि जयललिता की करीबी रहीं शशिकला अभी हाल ही में जेल से छूटी हैं. शशिकला के रिश्तेदार दिनाकरण सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के साथ गठबंधन चाहते हैं, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी अभी खामोश है. डीएमके के साथ कांग्रेस, एमडीएमके, वीसीके, सीपीआई और सीपीएम का गठजोड़ है. कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मयम को 4 फीसदी वोट मिले थे और वह भी कई सीटों पर प्रभाव छोड़ सकती है. 

असम की 126 सीटों में मुकाबला एनडीए और यूपीए के गठबंधनों के बीच देखने को मिलेगा. बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए में असम गण परिषद, बोडो लैंड शामिल है. जबकि यूपीए में कांग्रेस, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल्स और एआईयूडीएफ भी है. 2016 के चुनाव में एनडीए को 86 और यूपीए को 26 सीटें मिली थीं। एआईयूडीएफ के पास 13 सीट थीं. हालांकि एनडीए का वोट प्रतिशत यूपीए से 10 फीसदी ज्यादा रहा. 


केरल की बात करें तो 140 सीटें हैं.  सत्तारूढ़ एलडीएफ में 10 दल हैं, जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ में चार दल हैं. एलडीएफ ने 2016 चुनाव में 43.4 फीसदी के साथ 91 सीटें हासिल की थीं. जबकि यूडीएफ 38.81 फीसदी वोट के साथ 47 सीटें ही जीत सकी थीं. बीजेपी को भले ही एक सीट मिली थी, लेकिन उसे करीब 15 फीसदी वोट मिला था.

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पुदुच्चेरी में 30 सीटें हैं. 2016 के चुनाव में कांग्रेस ने 15, एआईएनआरसी को 8, एआईएडीएमके को 4, डीएमके को 2 और निर्दलीय के खाते में एक सीट गई थी, लेकिन चुनाव के तीन महीने पहले कांग्रेस की नारायणसामी सरकार गिर गई है. राष्ट्रपति शासन के अधीन यहां चुनाव होगा.