
आम आदमी पार्टी (AAP) में जारी आंतरिक संकट के बीच बताया जा रहा है कि पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के कई नेता एक के बाद एक करके सामने आ रहे स्टिंग और विवादों से 'बेहद निराश' हैं और पार्टी में बने रहने पर फिर से विचार कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के कई नेताओं का मानना है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी के अहम पदों से हटाए जाने के बाद 'आप' नेताओं का 'दिल्ली वाला गिरोह' उनकी इकाई में 'ज्यादा दखलंदाजी करेगा।' पार्टी के फैसलों पर 'नाराजगी' जताते हुए महाराष्ट्र इकाई के वरिष्ठ नेता मारूति भापकर ने सोमवार को पद छोड़ने की धमकी दी।
सोमवार को दिल्ली से रवाना होने से पहले भापकर ने कहा, 'राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जो कुछ हुआ वह लोकतंत्र की हत्या से कम कुछ भी नहीं था। मैं बहुत दुखी हूं और पार्टी छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं। हम कल उस वक्त अपने भविष्य के कदम पर फैसला करेंगे जब हमारी प्रदेश समिति की बैठक होगी।
राज्य के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, 'महाराष्ट्र इकाई पहले ही तथाकथित 'आप' नेताओं के 'दिल्ली वाले गिरोह' से डरी हुई है। पार्टी में अभी हो रही छीछालेदर से अब हमारी इकाई में और दखलंदाजी होगी। हम अभी दोराहे पर हैं।'
'आप' नेता ने कहा, 'शुरुआत से ही दिल्ली के नेताओं ने प्रदेश इकाइयों को कभी भी खुली छूट नहीं दी और कुमार विश्वास, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया एवं आशीष खेतान जैसे अरविंद केजरीवाल के वफादारों ने हर मोड़ पर हमें नसीहत देने का काम किया, जबकि उनके पास लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच काम करने का अनुभव न के बराबर है।' बहरहाल, उन्होंने कहा कि वह घटनाक्रमों पर नजर रखेंगे लेकिन पार्टी में बने रहने की संभावनाएं बहुत कम है।
महाराष्ट्र में अण्णा आंदोलन की अगुवाई कर चुके मयंक गांधी पहले ही केजरीवाल के 'तानाशाही' रवैये के खिलाफ बगावत कर चुके हैं, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन उनके एक करीबी सूत्र ने कहा, 'मौजूदा हालात में उनके लिए (मयंक के लिए) पार्टी में काम करना लगभग असंभव हो गया है।'
पार्टी के एक नेता ने कहा, 'आप' की महाराष्ट्र इकाई की पूर्व प्रवक्ता प्रीति शर्मा मेनन, जिन्हें राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सदस्यों के दस्तखत लेते देखा गया था, को छोड़कर कोई भी अब पार्टी का कार्यकर्ता बने रहने को लेकर उत्साहित नहीं है।' उन्होंने कहा, 'अंजलि दमानिया (जो पहले ही पार्टी छोड़ चुकी है), विजय पंधारे, सुभाष वारे और राज्य के कुछ अन्य बड़े नेता लगातार सामने आ रहे स्टिंग और विवादों से काफी निराश हैं।'
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