
खाद्य मंत्री राम विलास पासवान (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
असहनशीलता के बाद अब विपक्ष सरकार को महंगाई के मुद्दे पर घेरने की तयारी में है। मंगलवार को लोकसभा में दाल की बढ़ी हुई कीमतों पर 59 सांसदों के सवाल लिस्ट किए गए, जिनका जवाब लिखित में खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने दिया।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इतने सारे सांसदों ने प्रश्न काल के दौरान किसी दूसरे मुद्दे पर शायद किसी सवाल के लिए नोटिस नहीं दिया होगा। मुख्य सवाल था कि दाल की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं और इसे कंट्रोल करने के लिए सरकार ने अबतक क्या-क्या किया है।
अपने जवाब में पासवान ने माना कि पिछले एक साल में खुदरा बाजार में अरहर दाल की कीमत में 99 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस दौरान उड़द दाल की कीमत में करीब 87 फीसदी, चना दाल की कीमत में 53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज़ हुई है। पासवान ने ख़राब मौसम से लेकर ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग को दाल की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह बताया है।
पासवान ने कहा कि पिछले साल 2014-15 मैं अप्रैल से अगस्त के बीच 14.6 लाख टन दाल आयात की गई थी, जबकि इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच 19 लाख टन दाल आयात की जा चुकी है...यानी 30 फीसदी से ज्यादा।
लेकिन पासवान के ये जवाब सांसदों को खुश नहीं कर पाए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रे ने एनडीटीवी से कहा कि वो मंत्री जी के जवाब से खुश नहीं हैं। उन्होंने दाल के होर्डिंग के बारे मैं स्पेसिफिक सवाल पूछा था, लेकिन उसका जवाब उन्हें नहीं मिला। अब सौगत रे फिर से खाद्य मंत्री से सवाल पूछने की तैयारी कर रहे हैं। सांसद असादुद्दीन ओवैसी भी नाखुश दिखे। उन्होंने कहा कि वो संतुष्ट नहीं हैं और ज़मीन पर सरकार के दावों का असर दिख नहीं रहा है।
इन सांसदों के जवाब से साफ़ है कि खाद्य मंत्री को अभी लम्बे समय तक इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ेगी। अब राज्य सभा मैं बुधवार को महंगाई पर विस्तार से चर्चा होने वाली है। अब देखना होगा कि वो खाद्य मंत्री सांसदों को किस हद तक संतुष्ट कर पाते हैं।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इतने सारे सांसदों ने प्रश्न काल के दौरान किसी दूसरे मुद्दे पर शायद किसी सवाल के लिए नोटिस नहीं दिया होगा। मुख्य सवाल था कि दाल की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं और इसे कंट्रोल करने के लिए सरकार ने अबतक क्या-क्या किया है।
अपने जवाब में पासवान ने माना कि पिछले एक साल में खुदरा बाजार में अरहर दाल की कीमत में 99 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस दौरान उड़द दाल की कीमत में करीब 87 फीसदी, चना दाल की कीमत में 53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज़ हुई है। पासवान ने ख़राब मौसम से लेकर ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग को दाल की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह बताया है।
पासवान ने कहा कि पिछले साल 2014-15 मैं अप्रैल से अगस्त के बीच 14.6 लाख टन दाल आयात की गई थी, जबकि इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच 19 लाख टन दाल आयात की जा चुकी है...यानी 30 फीसदी से ज्यादा।
लेकिन पासवान के ये जवाब सांसदों को खुश नहीं कर पाए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रे ने एनडीटीवी से कहा कि वो मंत्री जी के जवाब से खुश नहीं हैं। उन्होंने दाल के होर्डिंग के बारे मैं स्पेसिफिक सवाल पूछा था, लेकिन उसका जवाब उन्हें नहीं मिला। अब सौगत रे फिर से खाद्य मंत्री से सवाल पूछने की तैयारी कर रहे हैं। सांसद असादुद्दीन ओवैसी भी नाखुश दिखे। उन्होंने कहा कि वो संतुष्ट नहीं हैं और ज़मीन पर सरकार के दावों का असर दिख नहीं रहा है।
इन सांसदों के जवाब से साफ़ है कि खाद्य मंत्री को अभी लम्बे समय तक इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ेगी। अब राज्य सभा मैं बुधवार को महंगाई पर विस्तार से चर्चा होने वाली है। अब देखना होगा कि वो खाद्य मंत्री सांसदों को किस हद तक संतुष्ट कर पाते हैं।
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