कृषि कानून के समर्थन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 20 हजार किसान दिल्ली मार्च करेंगे- किसान सेना

किसान सेना के संयोजक गौरी शंकर सिंह ने समाचार एजेंसी को  PTI को बताया कि कृषि कानून के समर्थन में राज्य के ब्रज क्षेत्र के किसान शामिल होंगे, जिसमें मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और हाथरस जैसे जिले शामिल हैं.

कृषि कानून के समर्थन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 20 हजार किसान दिल्ली मार्च करेंगे- किसान सेना

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

किसान सेना के लगभग 20,000 सदस्य केंद्र के कृषि क़ानून के समर्थन में गुरुवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक मार्च करेंगे. जिससे लगभग एक महीने तक शहर की सीमाओं के आसपास डेरा डाले हुए हजारों किसानों के साथ आमना-सामना होने की उम्मीद की जा रही है.किसान सेना के संयोजक गौरी शंकर सिंह ने समाचार एजेंसी को  PTI को बताया कि कृषि कानून के समर्थन में राज्य के ब्रज क्षेत्र के किसान शामिल होंगे, जिसमें मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और हाथरस जैसे जिले शामिल हैं, साथ ही मेरठ और मुजफ्फरनगर जिलों के किसान भी इसमें हिस्सा लेंगे.

उन्होंने कहा, "हमने दिल्ली के मार्च के संबंध में अनुमति के लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा है, लेकिन जवाब नहीं मिला है. किसी भी हालत में, गुरुवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलने के लिए लगभग 20,000 किसान दिल्ली जाएंगे ही."

इधर प्रदर्शनकारी किसान संघों ने गेंद सरकार के पाले में होने की जिक्र करते हुए बुधवार को उससे कहा कि वह बातचीत फिर से शुरू करने के लिये नया ठोस प्रस्ताव लेकर आए, वहीं कृषि मंत्री ने कहा कि समाधान तक पहुंचने का संवाद ही एक मात्र रास्ता है और सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये प्रतिबद्ध है.तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध खत्म होने की कोई संभावना नजर नहीं आने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को छह राज्यों के किसानों के साथ बातचीत करेंगे और इस दौरान किसान केंद्र द्वारा की गई विभिन्न पहलों को लेकर अपने अनुभव साझा करेंगे.

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कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर चुके किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें केंद्र के ‘खुले दिल' से वार्ता के लिये आगे आने का इंतजार है और “अगर सरकार एक कदम आगे बढ़ाएगी तो किसान दो कदम बढ़ेंगे.” बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती और ‘किसान दिवस' था तथा कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना जैसे विपक्षी दलों और वाम दलों ने इस मौके पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की रुचि सिर्फ कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने में है जबकि किसान सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिये मजबूर हैं. इस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा किसानों को गुमराह किया जा रहा है और भड़काया जा रहा है जबकि सत्ता में रहते हुए उन दलों ने उनका शोषण किया.

सरकार ने किसानों के कल्याण के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और उम्मीद व्यक्त की कि किसान संघ अपना प्रदर्शन वापस ले लेंगे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चरण सिंह से प्रेरणा लेते हुए किसानों के हित में अनेक कदम उठाये हैं. किसानों का वह किसी सूरत में अहित नहीं होने देंगे.'' उन्होंने कहा, “कृषि क़ानूनों को लेकर कुछ किसान आंदोलनरत हैं. सरकार उनसे पूरी संवेदनशीलता के साथ बात कर रही है. मैं आशा करता हूँ कि वे जल्द ही अपने आंदोलन को वापिस ले लेंगे.”

उत्तर प्रदेश के संभल में कृषि कानूनों पर सरकार के “हृदय परिवर्तन” के लिये यज्ञ का आयोजन किया गया तो वहीं भारतीय किसान संघ (लोक शक्ति) के प्रमुख श्योराज सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को कथित तौर पर अपने खून से पत्र लिखा. कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर 26 नवंबर से ही दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों के समर्थन में विभिन्न संगठन और कार्यकर्ता भी आगे आ रहे हैं. सरकार के बातचीत के प्रस्ताव पर जवाब को एक संवाददाता सम्मेलन में पढ़ते हुए किसान नेताओं ने कहा कि वे बातचीत के लिये खुले दिल से तैयार हैं लेकिन सरकार नए कृषि कानूनों में "निरर्थक" संशोधन करने की बात को नहीं दोहराए जिसे वे पहले ही खारिज कर चुके हैं.

स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार को “प्रेम पत्र” लिखना छोड़कर बातचीत के लिये लिखित में एक “ठोस” प्रस्ताव लेकर आना चाहिए. संघ के नेताओं की तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चली बैठक के बाद किसान नेता शिव कुमार कक्का ने संवाददाताओं से कहा कि कि सरकार को “अपना अड़ियल रुख छोड़कर” बातचीत के लिये अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए. कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को भेजे पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के साथ अपने “राजनीतिक विरोधियों” जैसा बर्ताव कर रही है. मोर्चा के सदस्य यादव ने कहा, " किसान संघ सरकार के साथ बातचीत करने को तैयार हैं और सरकार के बातचीत की मेज़ पर खुले दिमाग से आने का इंतज़ार कर रहे हैं. " केंद्र के 20 दिसंबर के पत्र के भेजे गए जवाब को बढ़ते हुए यादव ने कहा, “हम आपसे (सरकार से) अनुरोध करते हैं कि उन निर्रथक संशोधनों को न दोहराएं जिन्हें हम खारिज कर चुके हैं बल्कि बातचीत के लिये लिखित में ठोस प्रस्ताव लेकर आएं जो वार्ता का नया एजेंडा बन सकें.” यादव ने आरोप लगाया कि सरकार यह जताना चाहती है कि किसान बातचीत के लिये तैयार नहीं हैं.


(इनपुट भाषा से भी)

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