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नई स्टडी का दावा, योग से ओपिओइड नशे की लत से उबरना हो सकता है आसान

जिन मरीजों ने दवा के साथ योग किया, वे औसतन 5 दिनों में बेहतर महसूस करने लगे. वहीं, सिर्फ दवा लेने वाले मरीजों को ठीक होने में करीब 9 दिन लगे. यानी योग जोड़ने से रिकवरी लगभग दोगुनी तेजी से हुई.

नई स्टडी का दावा, योग से ओपिओइड नशे की लत से उबरना हो सकता है आसान
Digital Medicine : डॉक्टर हेमंत भार्गव के अनुसार, योग शरीर को 'स्ट्रेस मोड' से बाहर निकालकर उसे हीलिंग (ठीक होने) में मदद करता है.

नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. भारत में हुई एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर ओपिओइड नशे की लत के इलाज में दवाओं के साथ योग को भी जोड़ा जाए, तो मरीज ज्यादा जल्दी ठीक हो सकते हैं. यह स्टडी भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज़ (NIMHANS) में की गई. रिसर्च टीम का नेतृत्व कर रहे थे डॉ. हेमंत भार्गव. स्टडी में 59 ऐसे पुरुषों को शामिल किया गया जो ओपिओइड विदड्रॉल यानी नशा छोड़ने के शुरुआती दौर से गुजर रहे थे.

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क्या था इलाज?

सभी मरीजों को नशा छुड़ाने की दवा ब्यूप्रेनोर्फिन दी गई. इनमें से आधे मरीजों को 14 दिनों में कुल 10 योग सेशन भी कराए गए. हर सेशन करीब 45 मिनट का था, जिसमें सांस से जुड़े अभ्यास, हल्के योगासन और रिलैक्सेशन शामिल थे.

क्या निकला नतीजा?

जिन मरीजों ने दवा के साथ योग किया, वे औसतन 5 दिनों में बेहतर महसूस करने लगे. वहीं, सिर्फ दवा लेने वाले मरीजों को ठीक होने में करीब 9 दिन लगे. यानी योग जोड़ने से रिकवरी लगभग दोगुनी तेजी से हुई.

ओपिओइड छोड़ते वक्तक्या दिक्कतें होती हैं?

ओपिओइड छोड़ते वक्त शरीर और दिमाग पर काफी असर पड़ता है. मरीजों को घबराहट, नींद न आना, दर्द, बेचैनी, डिप्रेशन, दस्त, उल्टी, नाक बहना और भूख न लगने जैसी समस्याएं होती हैं. डॉ. हेमंत भार्गव के मुताबिक, इस दौरान शरीर का स्ट्रेस सिस्टम बहुत ज्यादा एक्टिव रहता है और शांत रहने वाला सिस्टम कमजोर पड़ जाता है.

योग कैसे करता है मदद नशा छुड़ाने में मदद

योग में माइंडफुलनेस, धीमी सांसें और रिलैक्सेशन तकनीकें होती हैं. ये शरीर को “हमेशा तनाव में रहने” वाली हालत से बाहर निकालकर ठीक होने की स्थिति में लाने में मदद करती हैं. यही वो जगह है जहां दवाएं पूरी तरह काम नहीं कर पातीं, लेकिन योग सहारा बनता है.

योग से क्या हुआ असर

स्टडी में पाया गया कि योग करने वाले मरीजों में-

  • घबराहट कम हुई
  • नींद बेहतर हुई
  • दर्द में राहत मिली
  • हार्ट रेट में सुधार आया

ये सभी चीजें इसलिए अहम हैं क्योंकि घबराहट और खराब नींद दोबारा नशे की तरफ ले जाने वाले बड़े कारण होते हैं.

आपको बता दें कि इस स्टडी में सिर्फ पुरुष शामिल थे. रिसर्चर्स का कहना है कि आगे महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा, क्योंकि हार्मोनल फर्क की वजह से महिलाओं में विदड्रॉल का अनुभव अलग हो सकता है. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या योग लंबे समय तक नशे से दूर रहने में मदद करता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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