हमारे समाज में पीढ़ियों से एक बात दोहराई जाती रही है, वंश तो बेटा ही आगे बढ़ाता है. इसी सोच की वजह से बेटे को परिवार का वारिस और बेटी को पराया धन मान लिया गया. लेकिन, आज जब साइंस और मनोविज्ञान इंसानी रिश्तों को गहराई से समझने लगे हैं, तो यह साफ हो रहा है कि कहानी इतनी सीधी नहीं है. हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में एक एक्सपर्ट ने इस सोच को चुनौती दी. उन्होंने बताया कि भले ही लोग मानते हों कि सिर्फ बेटा ही परिवार की विरासत आगे बढ़ाता है, लेकिन बायोलॉजी और साइंस एक बिल्कुल अलग कहानी कहता है. यह कहानी सिर्फ डीएनए की नहीं, बल्कि भावनाओं, व्यवहार और व्यक्तित्व की भी है.
बेटियां और पिता की इमोशनल कनेक्शन का साइंस
अक्सर आपने सुना होगा वह बिल्कुल अपने पापा जैसी है. यह बात सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी काफी हद तक सही मानी जाती है.
1. स्ट्रेस और दबाव से निपटने का तरीका
रिसर्च और मनोवैज्ञानिक स्टडीज़ के अनुसार, बेटियां अक्सर यह सीखती हैं कि उनके पिता तनाव को कैसे संभालते हैं. गुस्से में चुप हो जाना, मुश्किल हालात में शांत रहना या दबाव में तुरंत रिएक्ट करना. ये सारे पैटर्न बेटियां अनजाने में अपने पिता से अपनाती हैं.
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2. पर्सनैलिटी ट्रेट्स का असर
कॉन्फिडेंस, फैसले लेने की शैली, जोखिम उठाने की हिम्मत ये सब गुण कई बार पिता से बेटी में ट्रांसफर होते दिखते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि मां का असर नहीं होता, लेकिन पिता-बेटी के रिश्ते में एक अलग तरह की इमोशनल वायरिंग बनती है.
3. इसलिए पिता-बेटी का रिश्ता खास लगता है
लोग कहते हैं कि पिता बेटी से ज्यादा जुड़े होते हैं. इसकी वजह सिर्फ प्यार या लाड़ नहीं है, बल्कि वह इमोशनल पैटर्न है जो बचपन से बनता चला जाता है. इसलिए कई बार बेटी अपने पिता को सबसे पहले समझ लेती है बिना कुछ कहे.

बेटे और मां: माइटोकॉन्ड्रियल DNA की भूमिका
अब बात करते हैं बेटों की. यहां साइंस एक बहुत दिलचस्प फैक्ट बताता है.
1. माइटोकॉन्ड्रियल DNA सिर्फ मां से मिलता है
इंसान की हर कोशिका में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया को एनर्जी फैक्ट्री कहा जाता है. यह माइटोकॉन्ड्रियल DNA केवल मां से बच्चे को मिलता है, चाहे बच्चा बेटा हो या बेटी.
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2. इसका असर किन चीजों पर पड़ता है?
माइटोकॉन्ड्रियल DNA का सीधा संबंध होता है, शरीर का एनर्जी लेवल, मेटाबॉलिज्म, सेल हेल्थ, थकान से उबरने की क्षमता तक.
यानी जब कोई कहता है:
वह बिल्कुल अपनी मां जैसा है, तो इसमें सिर्फ शक्ल या आदतें नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही बायोलॉजिकल मशीनरी भी शामिल होती है.
3. मां-बेटे का गहरा बॉन्ड
इसी वजह से मां और बेटे के बीच एक अलग तरह का जुड़ाव देखा जाता है. बेटा अक्सर मां की भावनात्मक स्थिति को जल्दी समझता है और उससे गहराई से जुड़ा रहता है.
तो फिर वंश कौन बढ़ाता है?
साइंस यह साफ कहता है कि, बेटियां पिता के इमोशनल और बिहेवियरल पैटर्न आगे बढ़ाती हैं, बेटे मां की बायोलॉजिकल एनर्जी और सेल हेल्थ को. यानि विरासत सिर्फ नाम या खानदान की नहीं होती, विरासत होती है भावनाओं, व्यवहार और शरीर की गहराई से जुड़ी हुई.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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