Gender Dysphoria: जब किसी इंसान को ऐसा महसूस होने लगे कि उसकी पहचान (Gender Identity) और जन्म के समय मिला जेंडर (Sex assigned at birth) एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे, तो इस वजह से होने वाली मानसिक परेशानी या बेचैनी को जेंडर डिस्फोरिया (Gender Dysphoria) कहते हैं. जरूरी नहीं कि हर ट्रांसजेंडर या जेंडर-डाइवर्स व्यक्ति को यह महसूस हो. कई लोग अपने शरीर और पहचान के साथ एकदम सहज होते हैं, लेकिन जिन्हें परेशानी होती है, उनके लिए सही इलाज और सपोर्ट बहुत जरूरी है.
जेंडर डिस्फोरिया के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Gender Dysphoria)
Gender Dysphoria: जेंडर डिस्फोरिया सिर्फ पुराने ढर्रे के जेंडर व्यवहार (जैसे लड़के-लड़की का पहनावा) से अलग होने का नाम नहीं है. यह एक गहरी और लंबे समय तक रहने वाली इच्छा है कि आप उस जेंडर के रूप में जिएं जिससे आप खुद को जोड़ पाते हैं. इसके मुख्य लक्षण ये हो सकते हैं:
- अपने प्राइवेट पार्ट्स या शरीर की बनावट (जैसे दाढ़ी या ब्रेस्ट) और अपनी असली जेंडर पहचान के बीच बड़ा अंतर महसूस होना.
- अपने शरीर के अंगों को बदलने या जेंडर के हिसाब से होने वाले शारीरिक बदलावों को रोकने की तीव्र इच्छा.
- समाज में दूसरे जेंडर के रूप में पहचाने जाने या वैसा बर्ताव किए जाने की चाहत.
- यह पक्का यकीन होना कि आपकी भावनाएं और व्यवहार दूसरे जेंडर से मिलते हैं.
- यह एहसास बचपन से शुरू हो सकता है या प्यूबर्टी (किशोरावस्था) के दौरान उभर सकता है.
- कुछ लोगों में यह जीवन के बाद के पड़ाव पर भी महसूस होता है.
होने वाली मुश्किलें और चुनौतियां (Complications of Gender Dysphoria)
जेंडर डिस्फोरिया का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर बहुत गहरा पड़ता है:
सामाजिक दिक्कतें: स्कूल या ऑफिस में अपने जन्म के जेंडर के हिसाब से रहने का दबाव तनाव पैदा करता है. इस वजह से पढ़ाई छोड़ने या नौकरी न मिल पाने जैसी नौबत आ सकती है.
मानसिक स्वास्थ्य: लगातार भेदभाव और डर के कारण एंग्जायटी, डिप्रेशन, खुद को नुकसान पहुंचाना (Self-harm) या नशीली चीजों की लत लग सकती है. इसे 'जेंडर माइनॉरिटी स्ट्रेस' भी कहा जाता है.
हेल्थकेयर में बाधा: सही डॉक्टर न मिलना, भेदभाव का डर या इंश्योरेंस न होना इलाज को मुश्किल बना देता है. अगर समय पर सपोर्ट न मिले, तो सुसाइड (आत्महत्या) का जोखिम बढ़ जाता है.

जांच और इलाज (Diagnosis & Treatment of Gender Dysphoria)
डॉक्टर जेंडर डिस्फोरिया का पता तब लगाते हैं जब यह परेशानी कम से कम 6 महीने से बनी हो और आपकी निजी या प्रोफेशनल लाइफ को प्रभावित कर रही हो.
जेंडर डिस्फोरिया के इलाज के तरीके:
इलाज का मकसद आपकी पहचान और शरीर के बीच तालमेल बिठाना है. इसके लिए आप एक्सपर्ट्स (जैसे WPATH जैसी संस्थाएं) की मदद ले सकते हैं.
- जेंडर एक्सप्रेशन में बदलाव: अपनी पहचान के हिसाब से कपड़े पहनना, बातचीत का तरीका या व्यवहार बदलना.
- मेडिकल ट्रीटमेंट: इसमेंहार्मोन थेरेपी औरजेंडर-अफरमिंग सर्जरी शामिल है, जिससे शरीर को अपनी जेंडर पहचान के करीब लाया जा सके.
- बिहेवियरल हेल्थ थेरेपी (काउंसलिंग): इसका मकसद आपकी पहचान बदलना नहीं, बल्कि आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाना है. यह आपको भेदभाव से लड़ने, सपोर्ट नेटवर्क बनाने और मेडिकल फैसलों में मदद करती है.
- अन्य कदम: नया नाम और प्रोनाउन (Pronouns) अपनाना, आवाज की थेरेपी, अनचाहे बालों को हटवाना या लीगल डॉक्यूमेंट्स में नाम बदलवाना.
सपोर्ट कैसे पाएं? (Coping and Support)
अगर आपके पास परिवार और दोस्तों का साथ है, तो डिस्फोरिया से लड़ना बहुत आसान हो जाता है.
- अपने जैसे दूसरे लोगों (LGBTQ+ कम्युनिटी) से बात करें और सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ें.
- डॉक्टर से मिलने से पहले अपने लक्षणों, दवाओं और तनाव की एक लिस्ट जरूर बना लें ताकि आप खुलकर अपनी बात रख सकें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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