वजन कम करने के लिए आजकल फास्टिंग यानी उपवास का तरीका सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. इसमें न तो कोई अलग से मुश्किल डाइट चार्ट फॉलो करना पड़ता है और न ही घंटों बैठकर हर निवाले की कैलोरी गिननी पड़ती है. फास्टिंग में सारा ध्यान इस बात पर होता है कि आपको किस समय खाना है, बजाय इसके कि आप क्या खा रहे हैं. इसका सीधा सा नियम दिनभर की टोटल कैलोरी को कम करना होता है. लेकिन दिक्कत ये है कि बहुत से लोग फास्टिंग का मतलब बिना सोचे-समझे सिर्फ भूखे मरना समझ लेते हैं.
अगर इसे गलत तरीके से किया जाए तो फायदे की जगह बुरा असर पड़ता है. खाने के वक्त अचानक बहुत सारा खाना खा लेना या बिना आदत के अचानक लंबे उपवास रखने से भूख वाले हॉर्मोन बिगड़ जाते हैं और फैट घटने के बजाय मसल्स कमजोर होने लगती हैं. इसी वजह से अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या फास्टिंग सच में असरदार है और इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है.
अमिताभ बच्चन, आमिर खान, रणबीर कपूर, राम चरण और जैकलीन फर्नांडीज जैसे बड़े सितारों को ट्रेनिंग देने वाले मशहूर सेलिब्रिटी फिटनेस कोच शिवोहम भट्ट ने अपने एक वीडियो में इस पर खुलकर बात की है. उनका कहना है कि जब लोग फास्टिंग शुरू करते हैं तो उनका सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसका फैट लॉस और मसल्स बिल्डिंग पर क्या असर पड़ेगा.
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फास्टिंग से वजन कैसे घटता है, समझें 3 अहम बातें
कोच शिवोहम के मुताबिक, फास्टिंग शरीर में तीन अलग-अलग तरीके से काम करती है जिससे वजन कम होने लगता है.
- खाने के मौके कम मिलना: जब आप दिन के कुछ ही घंटों में खाते हैं, तो दिनभर बार-बार मुंह चलाने की आदत अपने आप छूट जाती है. ऐसे में बिना किसी सख्त पोर्शन कंट्रोल के भी आपकी ओवरऑल कैलोरी इनटेक कम हो जाती है. फैट लॉस का पहला उसूल ही ये है कि आप जितनी एनर्जी खर्च करते हैं, उससे कम खाएं. फास्टिंग इस हिसाब-किताब को काफी आसान बना देती है.
- इंसुलिन लेवल में कमी आना: जब हम उपवास पर होते हैं तो शरीर में कार्ब्स नहीं जाते. कार्ब्स न जाने से खून में इंसुलिन का लेवल काफी नीचे रहता है. जब इंसुलिन कम होता है, तो शरीर में पहले से जमा फैट को एनर्जी के लिए इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है. खासकर जिन लोगों को इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत होती है, उनके लिए ये काफी फायदेमंद रहता है.
- क्रेविंग्स और बेवक्त भूख पर लगाम: लगातार कम खाने वाली डाइट में लोग अक्सर भूख की वजह से हार जाते हैं. फास्टिंग में ऐसा नहीं होता. कुछ वक्त बाद शरीर का हंगर हॉर्मोन यानी घ्रेलिन कंट्रोल में आ जाता है. दिनभर अचानक होने वाली तेज क्रेविंग्स रुक जाती हैं और बार-बार स्नैकिंग करने की आदत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.
लेकिन शिवोहम ये भी साफ करते हैं कि सिर्फ फास्टिंग शुरू कर लेने से फैट अपने आप गायब नहीं हो जाएगा. लंबे समय तक फैट घटाने के लिए बॉडी में एनर्जी डेफिसिट होना बेहद जरूरी है. वजन कम होने के साथ-साथ फास्टिंग से बॉडी में सूजन (इन्फ्लेमेशन) कम होती है, बीपी बेहतर रहता है और शरीर के अंदरूनी सेल्स की नेचुरल सफाई होती है.
शुरुआत करने वालों के लिए जरूरी नियम
अगर आप पहली बार फास्टिंग करने की सोच रहे हैं, तो शुरू में ही 16 या 18 घंटे भूखे रहने की गलती बिल्कुल न करें-
- शुरुआत हमेशा 12 घंटे के आसान उपवास से करें, जैसे रात को 8 बजे खाना खाकर सुबह 8 बजे नाश्ता करना. जब शरीर इसका आदी हो जाए तब धीरे-धीरे टाइम बढ़ाएं.
- फास्टिंग के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें. खूब पानी पिएं, बिना चीनी वाली ब्लैक कॉफी या हर्बल टी भी ले सकते हैं.
- अपने शरीर के सिग्नल्स पर ध्यान दें. अगर अचानक बहुत ज्यादा चक्कर आने लगें, कमजोरी महसूस हो या घबराहट हो, तो जिद न करें और तुरंत कुछ हल्का-फुल्का खाकर फास्ट तोड़ लें.
- जब खाने का समय हो, तो कचौरी-समोसे या मीठा खाने के बजाय ताजी सब्जियां, फल, दाल, अंडे और हेल्दी फैट्स जैसे पौष्टिक खाने पर ध्यान दें ताकि बदन को ताकत मिले.
- कोई ऐसा रूटीन चुनें जिसे आप लंबे वक्त तक बिना किसी परेशानी के चला सकें. डेली रूटीन में बदलाव करते रहने से शरीर कन्फ्यूज हो जाता है.
- अगर किसी को शुगर, लो बीपी या पहले से कोई पुरानी बीमारी है, तो फास्टिंग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह मशविरा करें.
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