घुटनों में दर्द होने पर अक्सर लोगों को वॉक करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कुछ लोगों की शिकायत होती है कि आधा घंटा चलने के बाद दर्द या सूजन कम होने के बजाय बढ़ जाती है. खासकर सीढ़ियां चढ़ते समय या उठने-बैठने में परेशानी महसूस हो सकती है. ऐसे में सवाल है कि क्या चलने का तरीका बदलने से घुटनों पर पड़ने वाले दबाव में फर्क पड़ सकता है?
नी और जॉइंट स्पेशलिस्ट डॉ. विक्रम मस्कर ने अपने YouTube चैनल पर इस बारे में जानकारी साझा की है. उनके मुताबिक, कुछ मरीजों में सामान्य वॉक के बजाय चलने के तरीके में बदलाव मददगार हो सकता है. बैकवर्ड वॉकिंग भी ऐसा ही एक तरीका है, लेकिन इसे हर किसी को अपने आप शुरू नहीं करना चाहिए.
जाने-माने नी और जॉइंट स्पेशलिस्ट डॉ. विक्रम मस्कर (Dr. Vikram Mhaskar) कहते हैं -
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क्या घुटनों के दर्द में उल्टा चलना अच्छा है?
सामान्य चाल में हमारे शरीर का जोर घुटने के जोड़ पर आगे की ओर पड़ता है. जब आप कदम पीछे खींचते हैं यानी उल्टा चलते हैं, तो पीछे की ओर चलने पर पैर जमीन पर रखने का तरीका बदल जाता है.
- बैकवर्ड वॉकिंग में पैर रखने का पैटर्न सामान्य वॉक से अलग होता है.
- शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए पैरों की मांसपेशियों को अलग तरीके से काम करना पड़ता है.
- अगर किसी को पहले से घुटने में दर्द या चोट है, तो इसे अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के बाद ही शुरू करना बेहतर है.
शुरुआत में बैकवर्ड वॉकिंग खुले या ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर करने से बचना चाहिए. संतुलन बिगड़ने का खतरा हो सकता है, इसलिए इसे सुरक्षित जगह पर करना जरूरी है.
Japanese Walking क्या है और जापानी वॉक का सही तरीका क्या है?
पिछले कुछ समय से 'जापानी वॉक' या Japanese Walking की काफी चर्चा है. इसे Interval Walking Training भी कहा जाता है. इसमें सामान्य स्पीड से लगातार चलने के बजाय तेज और धीमी चाल को बारी-बारी से अपनाया जाता है. आम तौर पर 3 मिनट तेज चलने के बाद 3 मिनट धीमी गति से चला जाता है. इस पैटर्न को दोहराकर करीब 30 मिनट की वॉक पूरी की जाती है.
हालांकि, घुटनों में पहले से दर्द, अर्थराइटिस, सूजन या हाल की चोट होने पर इसे हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता. ऐसे लोगों के लिए स्पीड और वॉक की अवधि उनकी स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए.
चलते-चलते अचानक रुक जाना शरीर पर क्या असर डालता है
वॉक खत्म करते समय अचानक रुकने के बजाय अपनी स्पीड धीरे-धीरे कम करनी चाहिए. डॉ. मस्कर के मुताबिक, तेज वॉक के बाद कुछ देर सामान्य गति से चलने से शरीर को कूल-डाउन होने का समय मिलता है. अगर वॉक के दौरान या बाद में चक्कर, कमजोरी या असहजता महसूस हो तो रुकें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें.
असल में होता क्या है?
पार्क में अक्सर लोग तेज रफ्तार से वॉक करते हैं और अचानक किसी परिचित को देखकर या फोन आने पर झटके से एक ही जगह ठिठक जाते हैं. डॉ. विक्रम मस्कर बताते हैं कि वॉक के बीच में एकदम से ब्रेक लगाना मांसपेशियों और खून के पूरे सिस्टम के लिए ठीक नहीं होता. जब आप चल रहे होते हैं, तो दिल तेजी से धड़ककर पैरों की तरफ खून भेजता है ताकि मांसपेशियों को भरपूर ऑक्सीजन मिल सके. पैर की पिंडलियां उस खून को वापस ऊपर दिल की तरफ पंप करने में मदद करती हैं.
इससे रक्त एक जगह ठहरने लगता है और ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट आ सकती है, जिससे चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाना बहुत आम बात है. तेज गति से चलने के बाद अचानक रुकने के बजाय कुछ देर धीरे चलना बेहतर होता है. डॉ. मस्कर के मुताबिक, वॉक खत्म करने से पहले स्पीड धीरे-धीरे कम करनी चाहिए. इस प्रक्रिया को कूल-डाउन कहा जाता है.
अगर आप बैकवर्ड वॉकिंग जैसी किसी नई एक्सरसाइज को आजमाना चाहते हैं, तो शुरुआत धीरे करें. खासकर घुटनों में पहले से दर्द, सूजन या चोट की समस्या हो तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है.
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