Change In Testing Rules For Blood Based Medicines: रक्त या खून से बनने वाली दवाओं के जांच नियमों में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है. इसके तहत आने वाले समय में रक्त उत्पादों (Blood Products) में वायरस (Virus) की दो बार जांच नहीं होगी. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने जांच नियमों में बदलाव के लिए प्रस्ताव जारी कर लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं.
दो बार वायरसों की होती हैं जांच
अभी नियमों के अनुसार, अगर किसी मानव का प्लाज्मा (खून का तरल पादर्थ) लिया जाता है, तो सबसे पहले उसमें तीन तरह के खतरनाक वायरस- हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis A), हेपेटाइटिस-सी (Hepatitis B) और एचआईवी (HIV) की जांच होती है. इसमें अगर ये सभी वायरस प्लाज्मा में नहीं मिले यानी अगर सभी की रिपोर्ट नेगेटिव (Negative) आती हैं, तभी उस प्लाज्मा (Plazma) को सुरक्षित किया जाता है और दवा निर्माण की अनुमति मिलती है.
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नियमों में क्या समस्या है?
नियमानुसार, अगर उस प्लाज्मा से किसी दवा का निर्माण किया गया तो उस अंतिम उत्पाद की दोबारा से वही तीन वायरसों की जांच होगी यानि एक ही वायरस के लिए दो बार जांच होती है. यही नियमों के बदलाव की मुख्य कारण है.
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सरकार क्या चाहती है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मौजूदा नियमों में बदलाव की वजह एक ही वायरस की दो बार जांच है. सरकार की मंशा है कि इस अनावश्यक दोहराव के बोझ को खत्म कर नियमों को वैश्विक फार्माकोपियल मानकों (Global Pharmacopoeial Standards) के अनुरूप बनाया जाए ताकि समय की बचत के साथ दवा निर्माण में तेजी आए.
सरकार ने मांगें सुझाव
मंत्रालय ने इसके लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है. सभी हितधारकों (Stakeholders), विशेषज्ञों और संबंधित संस्थानों से तय समय के अंदर सुझाव देने के लिए कहा है ताकि नियमों में बदलाव के साथ मरीजों की सुरक्षा बनी रहे.
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