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PCOS का नाम बदलकर PMOS क्यों किया गया? जानिए क्या बदलेगा महिलाओं के लिए

PCOS renamed PMOS: यह नाम बदलने का फैसला 10 साल से ज्यादा समय तक चली चर्चा के बाद लिया गया, जिसमें डॉक्टर, रिसर्चर और मरीजों के लिए काम करने वाले कई संगठन शामिल थे. विशेषज्ञों का कहना था कि “PCOS” नाम मेडिकल तौर पर सही तस्वीर नहीं दिखाता.

PCOS का नाम बदलकर PMOS क्यों किया गया? जानिए क्या बदलेगा महिलाओं के लिए
PCOS renamed PMOS: क्यों बदला गया है ये नाम.

PCOS renamed PMOS: दुनिया की महिलाओं में होने वाली सबसे आम लेकिन सबसे ज्यादा गलत समझी जाने वाली हेल्थ समस्याओं में से एक को अब नया नाम मिल गया है. Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) को अब Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS) कहा जाएगा. यह फैसला दुनियाभर के एंडोक्राइन और प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहमति के बाद लिया गया है और इसकी जानकारी मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित की गई है.

यह नाम बदलने का फैसला 10 साल से ज्यादा समय तक चली चर्चा के बाद लिया गया, जिसमें डॉक्टर, रिसर्चर और मरीजों के लिए काम करने वाले कई संगठन शामिल थे. विशेषज्ञों का कहना था कि “PCOS” नाम मेडिकल तौर पर सही तस्वीर नहीं दिखाता, क्योंकि इस बीमारी से जूझ रही कई महिलाओं में ओवरी में सिस्ट होते ही नहीं हैं. साथ ही पुराना नाम इस बीमारी के शरीर पर पड़ने वाले दूसरे असर जैसे मेटाबॉलिज्म, हार्मोन, मानसिक स्वास्थ्य और दिल की बीमारी के खतरे को भी सही तरीके से नहीं बताता था.

भारत के लिए भी यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां लाखों महिलाएं PCOS से प्रभावित हैं. इसे अब मोटापा, डायबिटीज, बांझपन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से भी जोड़ा जा रहा है. भारतीय रिसर्चर्स लंबे समय से कह रहे हैं कि इस बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाती और लोग इसे सिर्फ प्रेग्नेंसी या फर्टिलिटी की समस्या मान लेते हैं, जबकि यह जिंदगीभर असर डालने वाली मेटाबॉलिक बीमारी है.

PCOS का नाम बदलकर PMOS क्यों किया गया?

नया नाम Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome इसलिए रखा गया ताकि इस बीमारी की जटिल और पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली प्रकृति को सही तरीके से समझाया जा सके. The Lancet में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक पुराना नाम सिर्फ ओवरी में सिस्ट पर फोकस करता था, जबकि कई महिलाओं में सिस्ट बनते ही नहीं हैं. असल में यह बीमारी हार्मोन सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और ओवरी की कार्यप्रणाली से जुड़ी होती है.

नए नाम का मतलब इस तरह समझा जा सकता है:

  • Polyendocrine: शरीर के कई हार्मोन सिस्टम प्रभावित होते हैं
  • Metabolic: यह बीमारी इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और डायबिटीज के खतरे से जुड़ी है
  • Ovarian: इसका असर ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी पर पड़ता है
  • Syndrome: यानी यह कई लक्षणों और हेल्थ रिस्क का समूह है

The Endocrine Society का कहना है कि नाम बदलने का मकसद बीमारी की पहचान आसान बनाना, इससे जुड़ी शर्म या झिझक कम करना और इलाज को ज्यादा व्यापक बनाना है. विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पुराने नाम की वजह से कई महिलाओं को देर से बीमारी का पता चलता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर ओवरी में सिस्ट नहीं हैं तो उन्हें PCOS नहीं हो सकता.

आखिर PMOS क्या है?

PMOS वही बीमारी है जिसे पहले PCOS कहा जाता था. इसके पहचान करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है. यह एक हार्मोन और मेटाबॉलिक समस्या है, जिसमें आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं:

  • पीरियड्स का अनियमित होना या बंद हो जाना
  • एंड्रोजन हार्मोन का ज्यादा होना
  • मुंहासे और चेहरे पर बाल आना
  • वजन बढ़ना या वजन कम करने में दिक्कत
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस
  • प्रेग्नेंसी में परेशानी
  • कुछ महिलाओं में ओवरी में छोटे-छोटे फॉलिकल्स बनना

इस बीमारी से आगे चलकर इन समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है:

  • टाइप 2 डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • दिल की बीमारी
  • फैटी लिवर
  • नींद से जुड़ी दिक्कतें
  • डिप्रेशन और एंग्जायटी

दुनियाभर के विशेषज्ञों के मुताबिक लगभग हर 8 में से 1 महिला इस बीमारी से प्रभावित है.

भारत के लिए यह बदलाव क्यों अहम है?

भारत में खासकर किशोरियों और शहरों में रहने वाली युवा महिलाओं में PCOS के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ICMR द्वारा समर्थित एक बड़ी स्टडी में बताया गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी संख्या अलग-अलग है और भारतीय महिलाओं में कम उम्र में ही मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ रही हैं.

भारत की कई स्टडी में PCOS के मामले 3.7% से लेकर 22% से ज्यादा तक बताए गए हैं. यह आंकड़े जांच के तरीके और इलाके के हिसाब से अलग हैं.

रिसर्चर्स ने इसके बढ़ते मामलों के पीछे ये कारण बताए हैं:

  • कम शारीरिक गतिविधि
  • ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाना
  • मोटापा बढ़ना
  • नींद की कमी
  • तनाव
  • जेनेटिक कारण

सबसे अहम बात यह है कि भारतीय महिलाओं में कम उम्र में ही मेटाबॉलिक खतरे ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. Indian Journal of Medical Research में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक PCOS से पीड़ित भारतीय महिलाओं में एक-तिहाई से ज्यादा महिलाएं मेटाबॉलिक सिंड्रोम से भी प्रभावित होती हैं.

डॉक्टरों का मानना है कि PMOS नाम आने से लोगों का ध्यान सिर्फ फर्टिलिटी पर नहीं रहेगा, बल्कि डायबिटीज, दिल की बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य जांच पर भी जल्दी फोकस किया जाएगा.

क्या नाम बदलने से बीमारी की पहचान आसान होगी?

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि ऐसा हो सकता है. कई महिलाओं में बीमारी का पता लगाने में सालों लग जाते हैं, क्योंकि इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं और अक्सर इन्हें सिर्फ ब्यूटी या लाइफस्टाइल की समस्या मान लिया जाता है. नया नाम लोगों और डॉक्टरों को यह समझाने में मदद करेगा कि यह बीमारी सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं है.

रिसर्चर्स ने यह भी कहा कि पुराने नाम की वजह से कई समाजों में महिलाओं को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था, खासकर उन जगहों पर जहां प्रजनन से जुड़ी समस्याएं शादी और सामाजिक सोच को प्रभावित करती हैं.

भारत जैसे देश में, जहां पीरियड्स और महिलाओं की प्रजनन स्वास्थ्य पर खुलकर बात अभी भी कम होती है, विशेषज्ञों का कहना है कि नया नाम जागरूकता और इलाज तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है.

अब इलाज कैसा होगा?

नाम बदल गया है, लेकिन इलाज के तरीके लगभग वही रहेंगे.

इलाज में आमतौर पर शामिल हैं:

  • नियमित एक्सरसाइज
  • वजन कंट्रोल करना
  • संतुलित खाना
  • अच्छी नींद
  • तनाव कम करना
  • जरूरत पड़ने पर हार्मोन थेरेपी
  • मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं

अब विशेषज्ञ इस बीमारी के इलाज के लिए कई तरह के डॉक्टरों की टीम के साथ काम करने की सलाह भी दे रहे हैं, जिसमें शामिल हैं:

  • एंडोक्राइनोलॉजिस्ट
  • गायनेकोलॉजिस्ट
  • न्यूट्रिशनिस्ट
  • मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि PMOS नाम आने से हेल्थ सिस्टम इस बीमारी को ज्यादा व्यापक तरीके से समझेगा और सिर्फ फर्टिलिटी की समस्या मानकर इलाज नहीं करेगा.

PCOS का नाम बदलकर PMOS करना सिर्फ नाम बदलने भर का फैसला नहीं है. यह इस बात को दिखाता है कि अब वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि यह एक जटिल हार्मोन और मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसका असर महिलाओं की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है. भारत जैसे देश में, जहां लाखों महिलाओं को अभी तक सही पहचान और इलाज नहीं मिल पाता, यह बदलाव जागरूकता बढ़ाने, शर्म कम करने और जल्दी इलाज शुरू करने में मदद कर सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि PMOS को सिर्फ ओवरी की बीमारी नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली समस्या मानना महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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