Piles Treatment Without Surgery: पाइल्स या बवासीर एक ऐसी समस्या है, जिसके बारे में लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं. दर्द, जलन, खून आना और उठने-बैठने में परेशानी ये सब बवासीर के आम लक्षण हैं, लेकिन शर्म और डर की वजह से कई लोग इलाज टालते रहते हैं. जब समस्या बढ़ जाती है, तब मजबूरी में सर्जरी की बात सामने आती है. पुराने समय में बवासीर का इलाज सुनते ही लोगों के दिमाग में दर्दनाक ऑपरेशन, लंबा बेड रेस्ट और हफ्तों की रिकवरी घूमने लगती थी. लेकिन, मेडिकल साइंस ने अब इस तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है. इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव गंगवानी ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में बताया कि अब पाइल्स का इलाज पहले जैसा नहीं रहा. अब न तो लेट्रिन के रास्ते जाकर पाइल्स को काटने की जरूरत है और न ही लंबे दर्द और छुट्टी की.
पाइल्स का पुराना इलाज क्यों डराता था?
परंपरागत सर्जरी में पाइल्स को काटकर या हटाकर इलाज किया जाता था. इस प्रक्रिया में दर्द ज्यादा होता था. कई दिन अस्पताल में रहना पड़ता था. बैठने और चलने में दिक्कत आती थी. जख्म भरने में समय लगता था. इसी वजह से बहुत से मरीज सर्जरी से बचते रहे और बीमारी को बढ़ने देते रहे.
अब क्या है पाइल्स का नया और मॉडर्न इलाज?
डॉक्टर गौरव गंगवानी के अनुसार, अब पाइल्स के इलाज में कट या चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती. इस मॉडर्न और मिनिमली इनवेसिव तकनीक को कहा जाता है, हेमोराइड धमनी एम्बोलिजेशन (HAE) Hemorrhoid Artery Embolization (HAE). यह एक ऐसा इलाज है जिसमें बवासीर को सीधे काटने की बजाय, उस नस को टारगेट किया जाता है जो पाइल्स को खून सप्लाई कर रही होती है.
हेमोरॉयड आर्टरी इंबोलिजेशन कैसे काम करता है?
- इस प्रोसीजर में हथेली (हाथ) की नस से एक बहुत बारीक तार (कैथेटर) अंदर डाला जाता है.
- यह तार शरीर के अंदर से होते हुए उस आर्टरी तक पहुंचाई जाती है जो पाइल्स को खून देती है
- उस नस में छोटी-छोटी कॉइल्स और माइक्रो पार्टिकल्स डाले जाते हैं
- इससे पाइल्स में जाने वाला ब्लड फ्लो कम हो जाता है
- खून की सप्लाई कम होते ही पाइल्स धीरे-धीरे अपने आप सिकुड़ने लगती है
- इस पूरी प्रक्रिया में पाइल्स को न काटा जाता है और न ही बाहर से छेड़ा जाता है.
इस प्रोसीजर के बड़े फायदे:
डॉक्टर के मुताबिक, यह इलाज कई मायनों में मरीज के लिए बेहद आरामदायक है:
- कोई कट या सर्जरी नहीं
- कोई तेज दर्द नहीं
- चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं
- 3 घंटे बाद घर वापसी संभव
- अगले दिन से सामान्य काम शुरू कर सकते हैं.
- मल त्याग (लेट्रिन) के रास्ते में कोई छेड़छाड़ नहीं.
यानी मरीज की डेली लाइफ पर इसका लगभग कोई असर नहीं पड़ता.
यह प्रोसीजर कौन करता है?
यह पूरा इलाज इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है. ये ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टर होते हैं जो बिना बड़ी सर्जरी के इमेजिंग तकनीक (जैसे एंजियोग्राफी) की मदद से शरीर के अंदर इलाज करते हैं. यही वजह है कि यह प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित, सटीक और कम दर्द वाली मानी जाती है.
किन मरीजों के लिए यह इलाज फायदेमंद हो सकता है?
- जिन्हें बार-बार ब्लीडिंग पाइल्स की समस्या है.
- जो सर्जरी से डरते हैं.
- जिन्हें जल्दी काम पर लौटना है.
- जिनके लिए पारंपरिक ऑपरेशन जोखिम भरा हो सकता है.
हालांकि, हर मरीज के लिए सही इलाज अलग हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है.
जरूरी बात जो आपको जाननी चाहिए:
यह इलाज पाइल्स के कारण पर काम करता है, न कि सिर्फ लक्षणों पर. जब पाइल्स को खून देने वाली नस ही कंट्रोल हो जाती है, तो समस्या जड़ से कमजोर पड़ने लगती है. यही वजह है कि इसे बवासीर के इलाज में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं