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This Article is From Dec 06, 2024

भारत के बच्चे हो रहे हैं आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारी मायोपिया के शिकार, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीका

What is Myopia: मायोपिया को आमतौर पर निकट-दृष्टि दोष के रूप में जाना जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जहां चीजें स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती हैं.

भारत के बच्चे हो रहे हैं आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारी मायोपिया के शिकार, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीका
स्क्रीन टाइम बना रहा मायोपिया का शिकार.

What is Myopia: मायोपिया को आमतौर पर निकट-दृष्टि दोष के रूप में जाना जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जहां चीजें स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती हैं. यह दुनिया भर में एक बड़ी हेल्थ कंडिशन है. दुनिया भर में 2050 की शुरुआत में हर दो में से एक व्यक्ति निकट दृष्टि दोष का शिकार हो जाएगा, बच्चों और युवा वयस्कों में यह बढ़ रहा है. एक स्टडी में मायोपिया के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में बताया गया है.

मायोपिया के लक्षण (Symptoms of Myopia)

मायोपिया के लक्षणों की बात करें तो इसमें धुंधली दृष्टि, दूर की चीजों को देखने में कठिनाई, आंखों में तनाव, सिरदर्द और खासतौर से लंबे समय तक स्क्रीन के उपयोग के बाद थकान हो सकती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो आजकल की लाइफस्टाइल जिसमें लोग लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग और आउटडोर एक्टिविटी ना होने की वजह से बच्चों में मायोपिया के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है. बहुत ज्यादा स्क्रीन समय बच्चों की आंखों, रेटिना और मस्तिष्क को उत्तेजित करता है, जिससे आईबॉल में निकट दृष्टि परिवर्तन में तेजी आती है."

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मायोपिया का कारण (Cause of Myopia)

  • घर के अंदर रहने के कारण जरूरी प्राकृतिक रोशनी की कमी भी आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.
  • लोगों की लाइफस्टाइल में आए बदलाव भी इस बीमारी की वजह बनते हैं.
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति भी मायने रखती है, यह संभव है कि शहरी आबादी में मायोपिया से जुड़े आनुवंशिक जोखिम कारकों का प्रसार अधिक हो. ये सभी कारक हमारी आंखों, रेटिना और तंत्रिकाओं पर बहुत ज्यादा दबाव और तनाव डालते हैं जिसके चलते ये मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं.

मायोपिया का इलाज (treatment of myopia)

मायोपिया के इलाज की बात करें तो बच्चों में मायोपिया के लक्षणों को पहचानना जरूरी है. हालांकि इस स्थिति को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से इसमें मदद मिल सकती है. इसके रेगुलरली बच्चों का आई टेस्ट कराते रहना चाहिए. 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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