हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक के बारे में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, तो जानता हो नो. लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता होता है कि इसकी शुरुआत हार्ट को खून पहुंचाने वाली बहुत ही छोटी नसों से होती है. कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बिमल छाजेड़ का कहना है कि कोरोनरी आर्टरी वे ब्लड सेल्स हैं, जो हार्ट की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर खून पहुंचाती हैं. जब इन नसों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स जमा होकर ब्लॉकेज बना देते हैं, तो हार्ट को पर्याप्त ब्लड नहीं मिल पाता और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. छाजेड़ का कहना है कि हार्ट की अधिकांश गंभीर समस्याओं की जड़ इन्हीं कोरोनरी आर्टरी में होने वाला ब्लॉकेज है. आइए जानते हैं ये आर्टरीज क्या होती हैं, कैसे काम करती हैं और इनके बंद होने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है. ये जानकारी हार्ट एक्सपर्ट डॉ. बिमल छाजेड़ ने SAAOL Heart Center नाम के एक यूट्यूब चैनल पर शेयर की है. यहां इसे विस्तार से जानते हैं-
क्या होती हैं कोरोनरी आर्टरीज?
हमारा दिल पूरे शरीर में खून पहुंचाने का काम करता है. लेकिन दिल खुद भी एक मसल है, जिसे लगातार काम करने के लिए ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है. यही काम कोरोनरी आर्टरीज करती हैं. डॉ. बिमल छाजेड़ का कहना है कि हार्ट की बाहरी सतह पर मौजूद ये ब्लड आर्टरी हार्ट के मसल्स तक खून पहुंचाती हैं. इन्हें कोरोनरी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये दिल के ऊपर क्राउन की तरह फैली होती हैं.
हार्ट को खून पहुंचाने वाली 3 मुख्य आर्टरीज कौन-कौन सी हैं?
- राइड कोरोनरी आर्टरी (RCA) - हार्ट के दाहिने हिस्से में खून पहुंचाती है.
- लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी (LAD)- हार्ट के आगे वाले हिस्से को सप्लाई देती है.
- लेफ्ट करक्यूम फ्लेक्स आर्टरी - हार्ट के पीछे और बाएं हिस्से तक खून पहुंचाती है.
कितनी मोटी होती हैं ये नसें?
डॉ. छाजेड़ का कहना है कि कोरोनरी आर्टरीज बहुत पतली होती हैं. इनका आकार लगभग पेंसिल जितना यानी 4-5 मिलीमीटर तक हो सकता है. इतनी पतली नसों में जब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स जमा होने लगते हैं तो ब्लॉकेज बनने लगता है.
कैसे होता है हार्ट अटैक?
जब कोरोनरी आर्टरीज में फैट, कोलेस्ट्रॉल या अन्य पदार्थ जमा होकर ब्लड सर्कुलेशन रोक देते हैं, तो हार्ट के मसल्स तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता. ऐसे में हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है. आंशिक रूप से ब्लॉकेज की वजह से सीने में दर्द और अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि अगर ब्लड सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए, तो ये स्थिति हार्ट अटैक कहलाती है. हार्ट अटैक के बाद दिल की पंपिंग क्षमता कम हो सकती है. अगर स्थिति गंभीर हो जाए, तो मरीज की जान भी जा सकती है.
शरीर की जरूरत से ज्यादा ब्लड सप्लाई क्यों होती है?
डॉ. छाजेड़ बताते हैं कि कोरोनरी आर्टरीज को शरीर ने जरूरत से ज्यादा क्षमता के साथ बनाया है. आराम की स्थिति में हार्ट को कम खून चाहिए होता है, लेकिन दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या मेहनत करने पर दिल को कई गुना ज्यादा ऑक्सीजन और खून की जरूरत पड़ती है. इसलिए इन आर्टरीज में अतिरिक्त क्षमता मौजूद रहती है.
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