Annual Report on Registration of Births & Deaths in Delhi-2024 : दिल्ली में अब बच्चे घर में नहीं, बल्कि अस्पतालों में जन्म ले रहे हैं. सरकार की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस और बेहतर सरकारी सुविधाओं को भी दिखाता है.
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Institutional Delivery क्यों है जरूरी?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में होने वाला प्रसव मां और नवजात दोनों के लिए ज्यादा सेफ होता है. इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत इलाज, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की मौजूदगी और मॉर्डन मेडिकल सुविधाएं कॉम्प्लिकेशन के खतरे को काफी हद तक कम कर देती हैं. यही वजह है कि संस्थागत डिलीवरी (Institutional Delivery) को मातृ-शिशु सेहत की रीढ़ माना जाता है.

सरकारी योजनाओं का दिखा असर
दिल्ली में फ्री डिलीवरी सुविधाएं, जननी सुरक्षा योजना, बेहतर एम्बुलेंस सर्विस और प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर जांच जैसी योजनाओं ने महिलाओं का भरोसा अस्पतालों पर बढ़ाया है. गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, दवाइयां और पोषण संबंधी सलाह मिलने से भी सेफ डिलीवरी को बढ़ावा मिला है.
शिशु मृत्यु दर में सुधार का कनेक्शन
एक्सपर्ट्स का मानना है कि संस्थागत डिलीवरी (Institutional Delivery) बढ़ने का सीधा असर शिशु मृत्यु दर पर पड़ा है. अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को तुरंत मेडिकल केयर, वैक्सीनेशन और न्यूबॉर्न केयर मिलती है, जिससे उनकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
(यह लेख दिल्ली में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट - 2024 और दिल्ली का जनसांख्यिकीय स्वास्थ्य: पंजीकृत जन्म और मृत्यु का विश्लेषण, 2024 (अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार, जन्म और मृत्यु कार्यालय, एनसीटी दिल्ली सरकार) में आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है.)
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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