बीते गुरुवार 20 अगस्त को एक चौंका देना वाला मामला सामने आया है. टीचर की डांट और थप्पड़ के बाद बच्चे का मौके पर ही टीचर की गौद में गिर गया. बच्चे को जब अस्पताल पहुंचाया गया, तो बच्चो मृत घोषित (Teacher Slap Controversy) किया गया. इस घटना की CCTV फुटेज भी काफी तेजी से वायरल हो रही है. वहीं, बच्चे के पेरेंट्स का आरोप है कि टीचर की पिटाई से बच्चा दशहत में आ गया और इसीलिए उसको हार्ट अटैक आया.
इस तरह की घटनाएं जब सामने आती हैं, तो लोगों के मन में पहला सवाल यही उठता है कि क्या डर और सदमे की वजह से किसी को हार्ट अटैक आ सकता है? यहां हम इसी विषय के बारे में जानेंगे. इस विषय को जानने के लिए हमने दिल्ली स्थित CK बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन से बातचीत की है. यहां जानते हैं क्या डर और सदमे से दिल रुक जाता है?
डर और सदमा 'फाइट ऑर फ्लाइट' इमोशन को करता है एक्टिव
- इस विषय पर डॉ. अंशुल कुमार जैन का कहना है कि काफी ज्यादा डर, सदमा या अचानक इमोशनल स्ट्रेस शरीर में 'फाइट ऑर फ्लाइट' रिएक्शन को एक्टिव कर सकता है.
- इस वजह से एड्रेनालिन सहित स्ट्रेस पैदा करने वाले हार्मोन तेजी से बढ़ जाते हैं, जिससे दिल की धड़कनें, ब्लड प्रेशर और हार्ट रिदम एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है.
- सेंसटिव लोगों में ये स्थिति खतरनाक एरिदमिया (Irregular heartbeat) या दुर्लभ मामलों में सडन कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है.
इन प्वाइंट्स से साफ है कि डर और सदमा हार्ट अटैक का कारण बन सकता है, लेकिन जरूरी नहीं है कि हर एक मामले इसी कारण से सामने आए हों.
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ऐसी घटना को सीधे तौर पर हार्ट अटैक कहना सही नहीं
इस तरह की घटना को लेकर डॉ. जैन स्पष्ट करते हैं कि इस तरह की घटना को सीधे तौर पर 'हार्ट अटैक' कहना सही नहीं होगा. आमतौर पर हार्ट अटैक तब होता है, जब हार्ट की आर्टरी में ब्लॉकेज आ जाता है. बच्चों में सडन कार्डियक अरेस्ट काफी रेयर हैं और इसके पीछे पहले से मौजूद कोई हार्ट या इलेक्ट्रिकल समस्या, जैसे इनहेरिटेड रिदम डिसऑर्डर या कार्डियोमायोपैथी भी जिम्मेदार हो सकती है.
अनका कहना है कि बिना किसी मेडिकल टेस्ट और पोस्ट-इवेंट मेडिकल मूल्यांकन के इस तरह का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि सिर्फ डर, सदमा या थप्पड़ बच्चे की मौत का कारण बनी.
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