तीन देशों में खेला जा रहा फीफा 2026 विश्व कप अपने चरम की ओर है. खेल के स्तर ने फैंस की सांसें अटका दी हैं. और इसका सबूत रविवार को अमेरिका के मिसाउरी के कनास सिटी स्टेडियम में अर्जेंटीना और स्विट्जरलैंड के बीच खेले गए क्वार्टरफाइनल मुकाबले में देखने को मिला. जब अर्जेंटीना 1-0 से आगे चल रहा था, तब एक समय स्विटजरलैंड ने 67वें मिनट में गोल दाग कर दुनिया भर में अर्जेंटीनाई टीम के चाहने वालों की सांसे अटका दी थीं. मुकाबला 1-1 से बराबर था और धीर-धीरे पेनल्टी शूट-आउट की ओर चल पड़ा था. और जब एक्स्ट्रा टाइम के भी खत्म होने में सिर्फ 8 मिनट बाकी थे, तब अर्जेंटीना के 'द स्पाइडर' कहे जाने वाले जूनियल अल्वारेज के रूप में टीम को वह हीरो मिला, जिसने बेहतरीन गोल दागकर तमाम सुर्खियां मेसी से हटाकर अपने इर्द-गिर्द समेट ली.
🇦🇷 Second goal by Julian Alvarez 👌🇦🇷#ArgvsSwz#WorldCup2026 pic.twitter.com/vhshpQv4n1
— Cyvilok🇮🇳DC🕊IPL🕊WPL🕊DPL🕊WDPL🕊 (@Cyvilok1) July 12, 2026
टीम के लिए सबसे बड़े मौके पर गोल दाग कर इस ट्रक ड्राइवर के बेटे जूनियर अल्वारेज ने इस बेहतरीन गोल दागकर अर्जेंटीना को संकट के समय 2-1 की बढ़त ही नहीं दिलाई बल्कि अपने पिता और माता के त्याग को साकार करते हुए करोड़ों बच्चों को यह प्रेरणा भी दी कि गरीबी और घोर संघर्ष के झंझावत से निकलकर जब वह इस मंच पर ऐसा कर सकते हैं, तो दुनिया का हर बच्चा ऐसा कमाल कर सकता है. वास्तव में जूनियर अल्वारेज के जमीन से अर्श तक पहुंचने की कहानी बहुत ही रोचक रही है.
पिता का संघर्ष, माता के संस्कार
'कालचिन' का प्रभाव
कालचिन अर्जेंटीना के कॉर्डोबा प्रांत का एक बहुत ही छोटा कस्बा है. इस कस्बे की आबादी करीब 2500-3000 के बीच है. यहाँ के लोग मुख्य रूप से खेती और अनाज से जुड़े उद्योगों पर निर्भर हैं. जब जूलियन ने बड़े टूर्नामेंट खेलना शुरू किया, तो पूरा कस्बा उनके लिए प्रार्थना करता था, तो वहीं ट्रक ड्राइवर पिता गुस्तावो बेटे जूनियल के लिए बड़ी प्रेरणा बन गए.
Julian Alvarez is underrated bcos he's a very talented and intelligent player, maybe bcos he's somehow calm tho cos wtf is this🔥🔥🔥 https://t.co/dBqcbGjA8H
— Magek Boi (@its_magekboi) July 12, 2026
गुस्तावो ने अपने बच्चों को बेहतर जीवन देने के लिए दिन-रात मेहनत की. ट्रक ड्राइवर के रूप में लंबी दूरी तय करना और फिर अनाज फैक्ट्री में शारीरिक रूप से कठिन काम करना. पिता की इस कठिन मेहनत को दिल में बसाते हुए जुलियन ने अपना जज्बा, जुनून सब कुछ मैदान पर झोंक दिया. वहीं, एक किंडरकार्टन की शिक्षिका जूलियन की मां ने बेटे को कभी भी अनुशासन, शिष्टाचार से दूर नहीं होने दिया.
ट्रकों के पीछे दौड़ने के किस्से
दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने के साथ ही जूलियल अल्वारेज ने बचपन से पिता को तपती दोपहर में पीठ पर बोरियां लादते और ट्रक चलाते देखा, तो जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि यहां कुछ भी मुफ्त नहीं ही मिलता. कई मौके ऐसे थे, जब पिता ट्रक लेकर निकलते, तो अल्वारेज ही ट्रक के पीछे-पीछे दौड़ते. और यहां से मिला जज्बा बात में साफ-साफ मैदान पर उनकी दौड़ में समा गया.
जूलियन आज भी उन खिलाड़ियों में गिने जाते हैं जो 90 मिनट तक दौड़ते हैं और मैदान का कोई कोना नहीं छोड़ते. एक ऐसा खिलाड़ी, जो गोल दागने के लिए खड़ा होकर इंतजार नहीं करता, बल्कि हर समय उसके पैर हर समय किसी मकसद से पीछा कर रहे होते. कभी साथियों को सहयोग के लिए, तो कभी विरोधी को छकाने लिए, तो कभी उन पर दबाव बनाने के लिए. कई बार इंटरव्यू में जूलियन अल्वाजे ने जिक्र किया, 'जब भी मुझे मैदान पर थकान महसूस हुई, तो अपने पिता का वह दृश्य याद आया, जो व्यक्ति एक भारी ट्रक को पूरे दिन संभाल सकता है.
बड़े भाई राफेल बने जूलियन का 'सपोर्ट सिस्टम
'द स्पाइडर' नाम जूलियन को उनके बड़े भाई राफेल ने दिया जो बचपन के दिनों से लेकर अभी तक उनका सपोर्ट सिस्टम बने हुए हैं. बचपन में जब वे अपने भाइयों और दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलते थे, तो जूलियन का गेंद पर कंट्रोल इतना अद्भुत था कि ऐसा लगता ता कि उनके दो ज्यादा पैर हों. मानो वह हर जगह मौजूद हूं. उनके भाई और साथी बच्चे खूब जोर लगाने के बाद भी जूलियन से गेंद नहीं कब्जा पाते थे. और इसी कौशल के कारण बड़े भाई राफेल ने उन्हें द स्पाइडर का नाम दिया.
आज भी वही बचपन के दोस्त
आज जूनियर अल्वारेज अर्जेंटीना के सबसे बड़े स्टार फुटबॉलरों में से एक है. और रविवार के मैच में सुपर गोल के बाद यह स्टारडम और ऊपर चला गया है. उनके टीम में रहते अर्जेंटीना ने विश्व कप जीता, तो मैनचेस्टर के साथ भी खिताबी जीत हासिल की, लेकिन बचपन में गरीबी, पिता के संघर्ष और मां के हर कद पर उन्हें लेकर बरती गई अतिरिक्त सतर्कता भी एक बड़ी वजह रही कि अल्वारेज कभी भी जीवन में कभी भी बुनियादी मूल्यों से अलग नहीं हुए. अभी भी जब वे छुट्टियां मनाने अपने कस्बे 'कालचिन' लौटते हैं, तो वे आज भी अपने बचपन के दोस्तों के साथ उसी पुरानी गलियों में फुटबॉल खेलते हैं और स्थानीय पिज्जा की दुकानों पर बैठते हैं. यह उनके संघर्ष के दिनों की याद उन्हें हमेशा जमीन से जोड़े रखती है.
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