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कंफर्म था इंग्लैंड के फाइनल का टिकट, फिर खुद के पैर पर मारी कुल्हाड़ी, कोच का यह फैसला बना हार का कारण

अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में 5 मिनट+ स्टापेज टाइम तक इंग्लैंड के फाइनल का टिकट कंफर्म लग रहा था, लेकिन फिर इंग्लैंड के कोच के फैसले ने पूरा मैच पलट दिया.

कंफर्म था इंग्लैंड के फाइनल का टिकट, फिर खुद के पैर पर मारी कुल्हाड़ी, कोच का यह फैसला बना हार का कारण
England Coach Thomas Tuchel Mistake

अर्जेंटीना ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट कटा लिया है. मैच की शुरुआत से लगने लगा था कि यह कोई फुटबॉल का मैच नहीं है, बल्कि कोई जंग का मैदान है. दोनों तरफ से फाउल किए गए. खिलाड़ियों ने एक दूसरे को रोका, गिराया, मारा. मेसी को लेकर इंग्लैंड के पास ठोस प्लान दिखा. पिकपोर्ड गोलपोस्ट के सामने दीवार की तरह खड़े रहे. दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने गोल करके 1-0 की बढ़त ले ली. इंग्लैंड के फैंस को हैसले बुलंद थे तो अर्जेंटीना के फैंस पर शिकन बढ़ती जा रही थी. मैच के 5 मिनट और उसके बाद स्टॉपेज टाइम तक यह लग रहा था कि इंग्लैंड 1966 के बाद अपने पहले फाइनल में पहुंच जाएगी और उसकी टैगलाइन इट्स होमकमिंग इस बार तो सही साबित होगी, लेकिन लाइन के बाहर से इंग्लैंड के कोच ने कुछ ऐसे फैसले लिए, जिससे पूरी कहानी ही पलट गई और लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने अटैक बढ़ाए. 85वें मिनट में अर्जेंटीना का पहला गोल हुआ. इसके बाद स्टॉपेज टाइम के दो मिनट के अंदर दूसरा और इंग्लैंड का 6 दशकों से चला आ रहा इंतजार और बढ़ गया.

एक गलत फैसला और 18 मिनटों में पल्टी बाजी

इंग्लैंड ने अपने वर्ल्ड कप सूखे को खत्म करने के लिए चैंपियंस लीग जीतने वाले कोच ट्यूशेल को हायर किया था. लेकिन चेल्सी, बायर्न म्यूनिख और पेरिस सेंट-जर्मेन के पूर्व बॉस को अर्जेंटीना के कम आंके गए स्कालोनी ने मात दे दी.

स्कालोनी को अक्सर क्लब फुटबॉल में बिना किसी बड़े अनुभव वाले व्यक्ति और सिर्फ़ मेसी को खुश रखने वाले के तौर पर देखा जाता है. लेकिन स्कालोनी ने अर्जेंटीना के साथ वर्ल्ड कप और दो कोपा अमेरिका ट्रॉफ़ी जीती हैं, और वह दूसरे वर्ल्ड कप के भी करीब हैं क्योंकि उन्होंने अहम मौकों पर अपने सब्स्टिट्यूशन से ट्यूशेल को मात दी.

जब इंग्लैंड अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा था, तो ट्यूशेल ने डिफेंसिव बदलाव किए. उन्होंने डिफेंडर एज़री कोंसा, डैन बर्न और निको ओ'राइली को मैदान पर उतारा. यह फैसला काफी गलत साबित हुआ. इंग्लैंड एक समय मुकाबले में 7 डिफेंडरों के साथ खेल रहा था और उसका पूरा प्रयास गोल करने से रोकने पर और अर्जेंटीना को कॉर्नर मिलने पर हेडर के जरिए बॉल को बाहर करने करने पर था. 

दूसरी तरफ अर्जेंटीना ने अलग ही काम किया. स्कालोनी ने अटैक में पूरी ताकत झोक दी. निको गोंजालेज ने मिडफील्ड से खतरा पैदा किया और डी पॉल ने भी टीम को आगे बढ़ाया. हालांकि, स्कालोनी को मजबूरी में डिफेंसिव सब्स्टिट्यूशन करने पड़े, लेकिन 1-0 से पीछे होने के बावजूद उन्होंने मैच में वापसी की कोशिश की.  81वें मिनट में मार्टिनेज को मैदान पर उतारना गेम-चेंजर साबित हुआ. क्योंकि इसके 4 मिनट के अंदर ही अर्जेंटीना ने गोल किया.

अर्जेंटीना के लिए निको गोंजालेज, गोंजालो मोंटिएल और लुटारो मार्टिनेज ने फील्ड पर आते ही अपना काम शुरू किया. एक बार जब अर्जेंटीन ने एंजो के गोल से बराबरी कर ली तो लगा कि ट्यूशेल अटैकिंग ऑप्शन अपनाएंगे. लेकिन वह डिफेंस पर ही टिके रहे. जबकि बराबकी का गोल करने के बाद अर्जेंटीना ने बढ़त लेने के लिए और अटैकिंग बदलाव किए. 

मार्टिनेज ने इंग्लैंड के डिफेंस के लिए कई मुश्किलें खड़ी कीं, और स्टॉपेज टाइम के दूसरे मिनट में विनिंग गोल किया. ट्यूशेल ने इसके बाद अपनी आखिरी कोशिश के रूप में मार्कस रैशफोर्ड और इवान टोनी को मैदान पर उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

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