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सिर्फ सुरों की नहीं, स्वाद की भी मलिका थीं आशा भोसले, कुकिंग था उनका छुपा हुआ हुनर

Asha Bhosle's Love For Cooking: 92 साल की उम्र में आशा भोसले के निधन के बाद कई लोग उनके संगीत को याद करने के साथ उनके खाना बनाने के शौक को भी याद कर रहे हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

सिर्फ सुरों की नहीं, स्वाद की भी मलिका थीं आशा भोसले, कुकिंग था उनका छुपा हुआ हुनर
Asha Bhosle's Love For Cooking
Instagram/asha.bhosle

Asha Bhosle's Love For Cooking: आशा भोसले का नाम लेते ही उनकी सुरीली आवाज और हजारों हिट गाने याद आते हैं. लेकिन उनकी जिंदगी का एक और खास पहलू भी था, जो उन्हें और अलग बनाता है. आशा ताई को खाना बनाने और अच्छे खाने का बेहद शौक था. उनके लिए कुकिंग सिर्फ एक काम नहीं था, बल्कि एक जुनून था. वह हर नई डिश को चखती थीं, उसके स्वाद को समझती थीं और फिर उसे अपने अंदाज में घर पर बनाने की कोशिश करती थीं.

90 के दशक के इंटरव्यू में दिखा कुकिंग का जुनून

1990 के दशक में दुबई में दिए गए एक इंटरव्यू में उनके इस शौक की झलक साफ नजर आई. एक पत्रकार के साथ लंच के दौरान वह अलग-अलग डिशेज का आनंद ले रही थीं. वह हर डिश के बारे में बताती थीं कि वह इसे अपने साउथ मुंबई वाले घर में कैसे बनाती हैं. खास बात यह थी कि उस समय उन्होंने अपने रेस्टोरेंट्स की शुरुआत भी नहीं की थी. इससे साफ है कि कुकिंग उनके दिल के कितनी करीब थी. 

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Photo Credit: Instagram/asha.bhosle

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खाने से प्रेम के बाद खड़ा किया कारोबार

आशा भोसले का खाने का शौक सिर्फ उनकी रसोई तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने इसे अपनी पहचान बनाया और आगे चलकर इसे कारोबार का रूप दिया. साल 2002 में दुबई में ‘Asha's' नाम से उन्होंने अपना फाइन डाइनिंग रेस्टोरेंट शुरू किया. धीरे-धीरे यह ब्रांड अबू धाबी, दोहा, बहरीन, कुवैत, मैनचेस्टर और बर्मिंघम तक पहुंच गया. उनके रेस्टोरेंट्स में भारतीय खाने का खास स्वाद और उनकी पसंद की झलक देखने को मिलती है.

ये थे उनके पसंदीदा खाने

साल 2025 में Curly Tales को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि पेशावरी ‘मां की दाल' उनकी सबसे पसंदीदा डिश थी. इसके अलावा उन्हें वरण भात जैसे सादे और घर के खाने भी बहुत पसंद थे. उनकी पसंद यह दिखाती है कि वह सादगी भरे स्वाद को ज्यादा महत्व देती थीं.

दूसरों से सीखा, खुद बनाया खास

आशा भोसले हमेशा नई चीजें सीखने के लिए तैयार रहती थीं. उन्होंने एक बार बताया था कि वह मोमो भी बनाती हैं, जो उन्होंने माला सिन्हा से सीखा था. इसके अलावा उन्होंने गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की पत्नी से भी खास व्यंजन बनाना सीखा था. इससे पता चलता है कि कुकिंग उनके लिए सीखने और एक्सप्लोर करने का जरिया भी था.

हरफनमौला शख्सियत की मिसाल

आशा भोसले सिर्फ एक महान गायिका ही नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थीं जिन्होंने अपने हर शौक को पूरी ईमानदारी से जिया. कुकिंग, ट्रैवल और संगीत, हर क्षेत्र में उनका जुनून साफ नजर आता था.

आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज के साथ-साथ उनका यह स्वाद भरा हुनर भी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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