विज्ञापन

इस दही में जो मिला वो आपकी सेहत के लिए है खतरनाक, जानें यहां

Amul Curd: अमूल के दही की लैब टेस्टिंग में जो रिपोर्ट निकल कर सामने आई है वो वाकई हैरान कर देने वाली है. आइए जानते हैं कि दहीं में ऐसा क्या मिला है.

इस दही में जो मिला वो आपकी सेहत के लिए है खतरनाक, जानें यहां
Amul Curd Lab Test: अमूल के दही में कौन सी गड़बड़ी पाई गई.

Amul Curd: एक समय था जब हम सभी लोग बाहर की चीज़ों पर ज़्यादा भरोसा नहीं करते थे और हर चीज को घर पर ही बना कर खाते हैं और इसे ही सुरक्षित माना जाता था. उस समय में चीजें आसानी से नहीं मिलती थी और घर के बड़े भी बाहरी चीजों का सेवन करने से मना करते थे. लेकिनन आज के समय में साइंस और लैब रिपोर्ट्स भी उसी ओर इशारा कर रही हैं. बता दें कि हाल ही में अमूल के मस्ती दही को लेकर सामने आई लैब टेस्टिंग रिपोर्ट ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. एक यूट्यूबर और स्वतंत्र फूड-टेस्टिंग प्लेटफॉर्म Trustified ने बाजार से अमूल मस्ती दही (प्लास्टिक पैकेजिंग वाला) लिया और उसको लैब टेस्ट के लिए भेजा. बता दें कि दही के टेस्ट में आई रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस दही में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया तय की गई सीमा से लगभग 2100 गुना ज्यादा पाया गए, जबकि यीस्ट और मोल्ड भी 60 गुना ज्यादा थे. यह आंकड़े किसी भी फूड प्रोडक्ट के लिए बेहद गंभीर माने जाते हैं.

कोलिफॉर्म्स होते क्या हैं?

आपको बता दें कि कोलिफॉर्म्स ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो आमतौर पर मल में पाए जाते हैं. फूड और पानी की जांच में इन्हें एक मार्कर की तरह देखा जाता है. अमूल दही में इनका मिलने का सीधा मतलब है कि वो फेकल कंटामिनेशन से प्रभावित है. खास बात यह है कि दूध और दूध से बने उत्पादों में कोलिफॉर्म्स की टॉलरेबल लिमिट ज़ीरो होती है. मतलब कि इन चीजों में इनको होना ही नहीं चाहिए.

ये भी पढ़ें: चांदनी चौक के जायके के दीवाने हुए इजरायल के स्पोक्सपर्सन गाय नीर, लूटते द‍िखे मजा, ये जगहें न करें मिस  

बता दें कि इस मामले ने जोर इसलिए और ज्यादा पकड़ा क्योंकि ये दही छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों को भी दिया जाता है. यहां तक की कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में अगर ई.कोली एक्सपोज़र हो जाए, तो यह पेट खराब होने से लेकर लाइफ-थ्रेटनिंग इन्फेक्शन तक पैदा कर सकता है.

अमूल ने दी सफाई 

अमूल ने अपने बयान में कहा है कि उनके प्रोडक्ट्स लैब-टेस्टेड और सुरक्षित हैं और यह रिपोर्ट मिसइन्फॉर्मेशन है. लेकिन सवाल यह भी है कि अगर पैकेजिंग पर सब कुछ लिखा जा सकता है, तो उसकी निगरानी कौन कर रहा है? FSSAI जैसी संस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं. आपको बता दें कि ये कंटामिनेशन सिर्फ प्लास्टिक पैकेजिंग वाले दही में पाया गया, तो शक पैकेजिंग, पानी की क्वालिटी या प्रोसेसिंग पर जाता है.

क्या है समाधान?

बता दें कि इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आप घर पर ही दही जमाइए. उबला हुआ दूध, साफ बर्तन और थोड़ा सा जामन. घर पर ही बिन केमिकल, बिना कंटामिनेशन के डर के शुद्ध दही बनाकर तैयार करें. 
 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com