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This Article is From Jul 15, 2011

रिव्यू : कैसी है 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा'

'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' में हाई और लो वोल्टेज इमोशनल ड्रामा की कमी है, जो सिंगल स्क्रीन में फिल्म को हिट कराता है।
Mumbai: 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' में ऋतिक रोशन का एक डायलॉग है कि 40 साल तक खूब पैसा कमाऊंगा…फिर रिटायरमेंट की जिंदगी अपने तरीके से जिऊंगा। इस पर कटरीना कैफ का डायलॉग है कि तुम्हें कैसे पता कि तुम 40 के बाद जियोगे। ऐसे कुछ सीन्स के साथ 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' अपने मकसद को कामयाबी से कहती है। तीन दोस्त हैं- पहला अर्जुन यानी ऋतिक रोशन…ये फाइनेंसियल ब्रोकर है। दूसरा इमरान यानी फरहान अख्तर….एड एजेंसी में कॉपीराइटर है। और तीसरा कबीर यानी अभय देओल…कंस्ट्रक्शन बिजनेस का ये बंदा अपनी शादी से पहले इमरान और अर्जुन को लेकर स्पेन की बैचलर ट्रिप पर निकलता है। ट्रिप पर सबके अपने छुपे हुए एजेंडे हैं। कोई असली पिता को ढूंढना चाहता है। कोई शादी के फैसले को सही और गलत के तराजू पर तौलना चाहता है और कोई ब्रेकअप के बाद जिंदगी का सही मतलब जानना चाहता है। ट्रिप पर तीनों दोस्त लड़ते-झगड़ते हैं, हंसते-खेलते हैं और अपनी जिंदगी के कई छिपे डरों से आजाद हो जाते हैं। इसमें मददगार साबित होती है डाइविंग इंस्ट्रक्टर लैला यानी कटरीना कैफ। डायरेक्टर जोया अख्तर की 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' उनके भाई फरहान अख्तर की फिल्म 'दिल चाहता है' को ट्रिब्यूट है। लेकिन 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' में हाई और लो वोल्टेज इमोशनल ड्रामा की कमी है, जो सिंगल स्क्रीन में फिल्म को हिट कराता है। 'दिल चाहता है' के मुकाबले यहां म्यूजिक भी बहुत एवरेज है। तीनों दोस्तों की आपसी बातचीत कई सीन्स में हंसाती है, लेकिन ये बहुत एक्साइटिंग भी नहीं। कुछ ही सीन्स दिल को छूते हैं। सबसे बड़ी कमजोरी है, फिल्म का स्लो पेस यानी इसका धीमा होना। खासकर इंटरवेल के बाद। रीयल लाइफ की रोड ट्रिप वाला रोमांच परदे पर हल्का होता दिखता है। लव और रिलेशन्स की फिलॉसफी काफी खींची गई। कुछ गाने काटे जा सकते थे। एक किस सीन को छोड़ दें, तो पूरी फिल्म साफ-सुथरी है। एक्टर्स के अच्छे परफॉरमेंस, स्पेन की बेहतरीन लोकेशन्स और अच्छा कैमरावर्क है। क्लाइमैक्स शानदार है, जहां सांड यानी बुल्स से बचकर भागते दोस्तों को जिंदगी का असली मकसद समझ में आ जाता है। 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' देखी जा सकती है, बशर्ते आप में धीमी फिल्म को देखने का सब्र हो। फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है- 2.5 स्टार।
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Vijay Dinesh Vashishtha
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