
अक्षय कुमार और भूमि पेडणेकर
नई दिल्ली:
‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’ को लेकर लंबे समय से चर्चे चल रहे थे, आज फिल्म रिलीज हो गई है. अक्षय कुमार और भूमि पेडणेकर ने फिल्म में जबरदस्त एक्टिंग की है. कहानी भी दिलचस्प है. फिल्म में उत्तर भारत की जो झलक दिखाई गई है, वह काफी रियल लगती है. अक्षय और भूमि का बोलने का अंदाज भी बढ़िया है. सुधीर पांडेय की एक्टिंग याद रहेगी. लेकिन निराश सेकंड हाफ करता है. फिल्म वन टाइम वॉच है. आइए हम बताते हैं, टॉयलेट एक प्रेम कथा को देखने की पांच वजहें-
यह भी पढ़ें: Movie Review: दिल की कम सरकार की बात ज्यादा है 'टॉयलेट एक प्रेम कथा'
अक्षय कुमार की दिल छू लेने वाली एक्टिंग
अक्षय कुमार अपनी अधिकतर फिल्मों में लाउड हो जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने नंदगांव के केशव का किरदार इस तरह निभाया है कि आपके मन में बस जाएगा. उनके वन लाइनर भी सीटीमार हैं.
Video: जानें कैसी है टॉयलेट: एक प्रेम कथा
भूमि पेडणेकर की मजबूत मौजूदगी
‘दम लगा के हईशा’ में भूमि ने हरिद्वार की ओवरवेट लड़की का किरदार निभाया था, इस बार वे उत्तर प्रदेश के मथुरा से हैं. यानी हर बार देसी. लेकिन दोनों ही कैरेक्टर एक दूसरे से कतई मेल नहीं खाते, यही उनकी एक्टिंग की सफलता भी है.

खुले में शौच मत करना
अक्षय इन दिनों ऐसी फिल्में बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो सामाजिक रूप से प्रासंगिक भी हों. उनकी ये फिल्म भी बिल्कुल वैसी ही है. लेकिन उन्हें सरकार का बहुत ज्यादा पक्ष रखने से बचना चाहिए.

अक्षय और भूमि की कैमिस्ट्री
अक्षय और भूमि पति-पत्नी के किरदार में हैं, और उनकी कैमिस्ट्री लाजवाब है. दोनों रियल लाइफ जैसे मियां-बीवी का एहसास देते हैं. ऐसी जोड़ियां बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलती हैं.

मथुरा की गलियां
टॉयलेट..में मथुरा पूरी तरह से रचा-बसा हुआ है. कलाकारों की भाषा और पूरा माहौल हमें असल जिदंगी के करीब ले जाता है. डायरेक्टर श्री नारायण सिंह की यह पहली फिल्म है, लेकिन डायरेक्शन की परिपक्वता उसमें नजर आती है.
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अक्षय कुमार की दिल छू लेने वाली एक्टिंग
अक्षय कुमार अपनी अधिकतर फिल्मों में लाउड हो जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने नंदगांव के केशव का किरदार इस तरह निभाया है कि आपके मन में बस जाएगा. उनके वन लाइनर भी सीटीमार हैं.
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भूमि पेडणेकर की मजबूत मौजूदगी
‘दम लगा के हईशा’ में भूमि ने हरिद्वार की ओवरवेट लड़की का किरदार निभाया था, इस बार वे उत्तर प्रदेश के मथुरा से हैं. यानी हर बार देसी. लेकिन दोनों ही कैरेक्टर एक दूसरे से कतई मेल नहीं खाते, यही उनकी एक्टिंग की सफलता भी है.

खुले में शौच मत करना
अक्षय इन दिनों ऐसी फिल्में बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो सामाजिक रूप से प्रासंगिक भी हों. उनकी ये फिल्म भी बिल्कुल वैसी ही है. लेकिन उन्हें सरकार का बहुत ज्यादा पक्ष रखने से बचना चाहिए.

अक्षय और भूमि की कैमिस्ट्री
अक्षय और भूमि पति-पत्नी के किरदार में हैं, और उनकी कैमिस्ट्री लाजवाब है. दोनों रियल लाइफ जैसे मियां-बीवी का एहसास देते हैं. ऐसी जोड़ियां बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलती हैं.

मथुरा की गलियां
टॉयलेट..में मथुरा पूरी तरह से रचा-बसा हुआ है. कलाकारों की भाषा और पूरा माहौल हमें असल जिदंगी के करीब ले जाता है. डायरेक्टर श्री नारायण सिंह की यह पहली फिल्म है, लेकिन डायरेक्शन की परिपक्वता उसमें नजर आती है.
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